साइबर क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति व चीन को मात

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय
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साइबर क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति व चीन को मात

अगर भारत और चीन के बीच में युद्ध हुआ, तो लड़ाई सिर्फ जमीन, आकाश और पानी में ही नहीं लड़ी जाएगी, साइबर क्षेत्र में भी लड़ी जाएगी। यह लड़ाई वही जीतेगा, जो साइबर क्षेत्र में सक्षम और महारत हासिल किया होगा । चीन की साइबर क्षमता के बारे में किसी को कोई संदेह नहीं है। जनसंख्या, व्यापार की तरह ही उसने साइबर के क्षेत्र में भी दक्षता प्राप्त कर ली है। इसका बहुत कुछ श्रेय उसकी इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र में प्राप्त महरथ है। वह केवल इलेक्ट्रानिक्स सामान ही नहीं बनाता है, अपितु उसके ही बनाए तमाम ऐप्स दुनियाँ के देशों में उपयोग किए जा रहे हैं। कम्प्यूटर, लैपटॉप से लेकर मोबाइल, जो इस समय सबसे अधिक उपयोग में लाये जा रहे हैं। उनका सबसे अधिक निर्माण चीन ही करता है। भारत ही नहीं, अमेरिका सहित दुनिया के सभी देशों में चीन के इलेक्ट्रानिक्स सामान का आधिपत्य है। सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने के कारण उपभोक्ताओं के लिए भी चीन का सामान पहली पसंद बना हुआ है । ये तो ऐसी बातें हैं, जिसे दुनिया का हर नागरिक जनता है । लेकिन कुछ ऐसे पहलू हैं जिसे भारत की आम जनता नहीं जानती है । जिसका उदघाटन
भारतीय सेना के इन्फॉर्मेशन सिस्टम के पूर्व डायरेक्टर जनरल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल पीसी कटोच ने अपने लेख में किया है । इस लेख के अनुसार एक लेख में लिखा था कि ये फाइटर जेट के क्रैश होने की वजह तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि चीन का साइबर अटैक था। 23 मई 2017 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर असम के तेजपुर एयरबेस से उड़ान भरे सुखोई-30 फाइटर जेट, जिसका संपर्क 11 बजकर 10 मिनट से टूट गया था। जिसका मालवा 26 मई को तेजपुर एयरबेस से 60 किमी दूर घने जंगल में मिला। उसके क्रैश होने की वजह तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि चीन का साइबर अटैक था।
इस घटना की सच्चाई के बाद भारत सरकार और भारतीय सेना दोनों काफी सतर्क हो गए । इससे सबक लेते हुए मई 2019 में भारत में साइबर हमलों से निपटने के लिए डिफेंस साइबर एजेंसी का गठन किया।
जिसका मुख्य काम चीन और पाकिस्तान के हैकर्स पर नजर रखना और उनकी ओर से होने वाले साइबर हमले को नाकाम करना है । यह एजेंसी जल-थल और वायु सेना की मदद करती है, किसी भी प्रकार के साइबर हमले की पूर्व सूचना देती है और फिर उस हमले को नाकाम करती है । यह एजेंसी बड़ी ही गोपनीयता के साथ काम करती है, और इस एजेंसी के साथ कौन-कौन जुड़े हुए हैं, इसकी जानकारी बहुत गोपनीय रखी गई है। जिससे इनकी भनक किसी को न लगे । लेकिन इनके संबंध में छपी कुछ रिपोर्टों को पढ़ने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि यह एजेंसी
नेटवर्क हैक करने, माउंट सर्विलांस ऑपरेशन करने, हनी पॉट्स रखने, हार्ड ड्राइव और सेलफोन से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और चैनल्स को ब्रेक करने जैसे कार्यों को बहुत ही कुशलता के साथ अंजाम देते है।
जब चीन की ओर से भारतीय सीमा पर जबरन कब्जा करने की कुचेष्टा की गई, जिसका जवाब भारत की सेना के 20 जवानों ने अपनी शहादत देकर दिया । वह चीन की ओर से इस बात से अनभिज्ञ नहीं था कि ऐसे में चीन साइबर अटैक कर सकता है । और साइबर अटैक उतना ही खतरनाक सिद्ध हो सकता है, जितना द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु बम का प्रयोग था । इसलिए भारत यह अच्छी तरह जानता है, कि अगर उसे चीन को शिकस्त देना है, तो साइबर के क्षेत्र में खुद को मजबूत करना है । इसी कारण जैसे ही चीन के कुत्सित प्रयास का पता चला, भारत की साइबर एजेंसी मुस्तैदी के साथ अपने काम पर लग गई । जिससे अगर चीन के तरफ से साइबर अटैक हो, तो उसका मुकम्मल जवाब दिया जा सके । गलवान घाटी की झड़प, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए। चीन के भी 40 से अधिक सैनिकों के हताहत होने के समाचार मिले। इसके बाद चीन बौखला गया और उसकी ओर से महज पाँच दिन में ही 40 हजार से ज्यादा साइबर अटैक किए गए । अध्ययन से पता चला कि चीन के पास एक मजबूत हैकरों की टीम है। जिसमें 3 लाख से अधिक हैकर काम करते हैं ।
जिन्हें वहां की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और चीनी विदेश मंत्रालय से की ओर जरूरत से अधिक धन उपलब्ध कराया जाता है।
2004 में चीन ने एक बार फिर अपनी गाइडलाइन में बदलाव किया । इस बदलाव में यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी युद्ध जीतने के लिए जल-थल और वायु सेना को पुख्ता जानकारी का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए अपने सभी पड़ोसी देशों की सामरिक सूचनाएँ इकट्ठा की जाएँ । 2013 में मिलिट्री साइंस एकेडमी के एक अध्ययन में चीन ने इस बात को स्वीकार किया कि इस युग में कोई भी युद्ध जीतने के लिए साइबर स्पेस की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी । इसी कारण चीन भारत से आमने-सामने युद्ध न करके साइबर युद्ध कर रहा है। लेकिन अभी तक उसके जितने भी अटैक हुए हैं, भारत की साइबर एजेंसी ने उसे नाकाम किया है ।
इसी कारण चीन ने अपनी सेना को पीपुल्स लिबरेशन और साइबर सेना में विभक्त कर दिया ।
2019 में एक अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार चीन की साइबर सेना के काम और उत्तरदायित्व का भी सुनिश्चित बंटवारा किया गया है। साथ ही दोनों का कद भी बराबर रखा गया है । दोनों को सहूलियतें और सुविधाएं भी बराबर दी गई हैं । चीन की इस साइबर सेना का एकही काम है कि वह दूसरे देशों की खुफिया सूचनाएं एकत्र करे और बीच-बीच में कम्यूटर नेटवर्क पर हमले करते रहे । इसके लिए चीन ने अपनी एक हैकिंग यूनिट बना रखी है । जिसे 61398 यूनिट नाम से जाना जाता है। इसका 12 मंजिला हेड क्वार्टर चीन के प्रसिद्ध शहर शंघाई के पुडोंग में है। इसकी गोपनीयता बरकरार रखने और और इसके द्वारा किए गए हैकिंग कार्यों के लिए खुद की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए चीनी सेना के रिकार्ड में इसका जिक्र नहीं किया गया है । चीन ने हाल ही इंटिग्रेटेड नेटवर्क इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का गठन किया । जिसका मुख्य काम कम्प्यूटर नेटवर्क पर हमला और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर है । इसके अलावा ब्लू फोर्स इन्फॉर्मेशन वॉर नाम से भी एक यूनिट है, जो जैमिंग और नेटवर्क अटैक का काम करती है।
इस अध्ययन से पता चलता है कि साइबर की दुनिया में चीन कितना स्ट्रॉंग है। किस तरह से वह अपनी इन यूनिटों के माध्यम से अपने पड़ोसी देशों पर सुनियोजित हमला करता है । साथ ही वह जानता है कि किस तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका ने खाड़ी देशों पर हमले के समय उन्हें शिकस्त देने के लिए साइबर सेना का इस्तेमाल किया ।
अपने देश को चीनी साइबर हमले से बचाने और उसको मुंहतोड़ जवाब देने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आखिरकार चीन के विरुद्ध कार्रवाई करना ही पड़ा । उनके निर्देश के बाद आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने भारत में प्रचलित चीन के 59 एप पर प्रतिबंध लगा दिया। जिसमें टिकटॉक, हेलो, वीचैट, यूसी न्यूज जैसे प्रमुख एप भी शामिल हैं। साथ ही अपने संदेश में यह कहा गया कि चीन के ये 59 एप भारत की संप्रभुता, अखंडता व सुरक्षा को लेकर पूर्वाग्रह रखते हैं। सरकार ने आईटी एक्ट के 69ए सेक्शन के तहत इन 59 एप पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार को इन एप के गलत इस्तेमाल को लेकर कई शिकायतें भी मिल रही है कि ये एप एंड्रायड एवं आईओएस प्लेटफार्म से डाटा चोरी करने में भी सहायक है । जिससे देश की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है । इससे चीन के कुत्सित मंसूबों पर पानी फिर गया । इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सेनाओं को यह आजादी भी दे दी कि सीमा पर चीन की हरकतों के अनुसार वे कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं । इसमें भारत की साइबर एजेंसी भी शामिल हैं।
इस प्रकार का निर्देश मिलते ही सेना के साथ-साथ साइबर एजेंसी भी अपने काम में बड़ी मुस्तैदी से लग गई। एक ओर वह चीन के साइबर हमलों का जवाब दे रही है, वहीं दूसरी ओर अपने देश की जल-थल और वायु सेनाओं के प्रमुखों को सभी आवश्यक सूचनाएँ भी मुहैया करवा रही है । इसी वजह से चीन की हर हरकत का भारत सरकार और भारतीय सेना देने में अभी तक समर्थ हुई है ।

प्रोफेसर डॉ. योगेन्द्र यादव
पर्यावरणविद, शिक्षाविद, भाषाविद,विश्लेषक, गांधीवादी /समाजवादी चिंतक, पत्रकार, नेचरोपैथ व ऐक्टविस्ट

 

रिपोर्ट  राजेश यादव

डिप्टी ब्यूरो चीफ फिरोजाबाद

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