86 फ़ीसदी तेल आयात करता है भारत

दुनिया

चीन और अमरीका के बाद भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है. ऐसा अनुमान है कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान भारत में तेल की खपत में 30 से 35 फ़ीसदी की कमी आई है.

सस्ता तेल आना भारत के लिहाज़ से बहुत अच्छी ख़बर मानी जा सकती है लेकिन नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि दूसरे तरीक़े से देखा जाए तो सस्ता तेल भारत के लिए ख़राब भी है.

वो कहते हैं, “भारत अपनी आवश्यकता का 86 फ़ीसदी तेल आयात करता है. भारत अपना अधिकतम तेल खाड़ी देशों से आयात करता है. अगर तेल के दाम लगातार कम रहे तो उन देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. उनकी अर्थव्यवस्था चरमराने से भारत पर दो तरीक़े से फ़र्क़ पड़ेगा. पहला यह कि वो हमारे सबसे बड़े निर्यात बाज़ार हैं जिनसे हमारी अर्थव्यवस्था जुड़ी हुई है और दूसरा यह कि वहां 80 लाख भारतीय हैं जिनकी नौकरियां जा सकती हैं.”

“इन सबके अलावा सामरिक दृष्टि से खाड़ी देश हमारे लिए बहुत अहम हैं. अगर आर्थिक संकट वहां पैदा होता है तो चरमपंथी ताक़तें मज़बूत होंगी जो भारत नहीं चाहता. भारतीय अर्थव्यवस्था 60 डॉलर प्रति बैरल तक के दाम झेलने के लिए तैयार है.”

कई देशों का एकसाथ मिलकर तेल के उत्पादन में कमी लाने को पूरी दुनिया के लिए अच्छा संकेत नहीं समझा जा रहा है.

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