कोरोनाकाल;पति पत्नी 88 प्रतिशत झगड़ो मे आई कमी, सर्वे से खुलासा

राष्ट्रीय

कोरोनाकाल ने लोगों की जिंदगी का रुख मोड़ दिया है। भले ही वायरस ने जिंदगी में कड़वाहट घोल दी है लेकिन रिश्तों में मिठास बढ़ी है। दिलों की दूरियां दूर हुई। रिश्तों में नजदीकियां बढ़ी हैं। जिन परिवारों में छोटी-छोटी बातों को लेकर हमेशा कहासुनी होती थी। झगड़े व मनमुटाव रहता था। कोरोना कॉल में लगे लॉकडाउन में रिश्तों में सुधार हुआ है।

442 लोगों पर हुआ सर्वे
इंडियन साइक्रेटी सोसाइटी की ओर से सर्वे हुआ। केजीएमयू, पीजीआई चंडीगढ़, गुजरात, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ समेत देश के अन्य मेडिकल संस्थान के मानसिक स्वास्थ्य विभाग ने हिस्सा लिया। केजीएमयू भी सेंटर के रूप में था। 442 लोगों ने सर्वे में हिस्सा लिया। इसमें 80 प्रतिशत पुरुष व 20 प्रतिशत महिलाएं शामिल हुईं। सभी की शिक्षा स्नातक व परास्नातक थी। केजीएमयू मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दलाल व डॉ. आदर्श त्रिपाठी की देख-रेख में सर्वे हुआ। इसमें लॉकडाउन से पहले व बाद के रिश्तों में आए बदलाव पर जानकारी मांगी थी।

गलतफहमी दूर हुई
डॉ. आदर्श त्रिपाठी के मुताबिक घर परिवार में बहुत बड़ी बात को लेकर झगड़े नहीं होते हैं। मामूली बात व गलतफहमी की वजह से रिश्तों में खटास आती है। पति-पत्नी मनमुटाव में अपनी बातों को साझा नहीं करते हैं। इससे परेशानी बढ़ जाती है। गुस्सा व तनाव भी रिश्तों की दरार को बढ़ाता है। लॉकडाउन में लोगों को वक्त मिला। लोगों ने परिवार संग बातें साझा करनी शुरू की।

कोरोना का डर
कोरोना के डर ने अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। नौकरी को लेकर लोगों में फिक्र बढ़ी है। जिंदगी को लेकर भी लोगों ने गंभीर चिंता जाहिर की।

तीन बिन्दुओं पर हुआ सर्वे
-59 प्रतिशत लोगों ने रिश्ते में सुधार की बात कही
-92 प्रतिशत लोगों ने आपस में बातचीत व एक दूसरे के साथ समय गुजारने
-88 प्रतिशत पति-पत्नी ने आपसी झगड़े लड़ाई कम होने की जानकारी साझा की।
-70 फीसदी महिलाओं ने पति द्वारा लॉकडाउन के दौरान पर्याप्त समय देने की बात कही।

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निजामुद्दीन के साथ अब्दुल शमीम की रिपोर्ट