कोरोना मुश्किलों से लेकर बचाव तक जानें सब कुछ सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत आखिर क्यों है खतरनाक

राष्ट्रीय

बीते 24 घंटे में देश में 40 हजार से ज्यादा कोरोना के नए मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमितों की संख्या 11 लाख के पार जा चुकी है। लक्षद्वीप को छोड़ दें तो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर राज्य में कोरोना ने अपनी पैठ बना ली है। कुछ राज्य तो ऐसे हैं, जहां शुरू में काबू पाया गया, लेकिन इस जानलेवा वायरस ने फिर से चपेट में ले लिया। 
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में कोरोना वायरस को लेकर सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो चुकी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि भारत में बढ़ते मामले सामुदायिक संक्रमण का ही परिणाम है। इस दावे को कई विशेषज्ञों का भी साथ मिल गया है। सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अरविंद कुमार का भी मानना है कि अब देश में सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो चुकी है। 
केंद्र सरकार हालांकि यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। रोजाना 30 हजार से ज्यादा केस आने के बावजूद सरकार इसी बात पर जोर दे रही है कि देश में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार सच से भाग रही है और उसे अब सच स्वीकार कर लेना चाहिए। आखिर सामुदायिक संक्रमण है क्या? यह स्थिति खतरनाक क्यों है? पहले से ही कोरोना की मार झेल रहे देश पर इसके क्या दुष्परिणाम होंगे? इससे कैसे बचा जा सकता है? ऐसे ही तमाम सवाल जो आपके मन में उठ रहे होंगे….उनके जवाब देने की एक कोशिश…
क्या है सामुदायिक संक्रमण इसे आसान शब्दों में समझें तो जब महामारी समुदाय में इस कदर फैल जाए कि यह पता ही न चले कौन किस वजह से संक्रमित हुआ है। उसे सामुदायिक संक्रमण कहते हैं।
संक्रमित होने वाला मरीज किस अन्य मरीज के संपर्क में आया था, जब यह पता लगाना नामुमकिन हो जाए, वही स्थिति सामुदायिक संक्रमण की होती है। 
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने देश में सबसे पहले इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम के तटीय इलाकों में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति दिख रही है। 
इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी पुष्टि करते हुए कहा कि हर रोज 30 हजार से ज्यादा केस आना सामुदायिक संक्रमण का नतीजा है।
रिपोर्टर नीतीश उपाध्याय
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