उप स्वास्थ्य मंत्री ओलेग ग्रिदनेव ने कहा है कि 12 अगस्त को दुनिया की इस पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का पंजीकरण कराया जाएगा – रूस

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न्यू दिल्ली। कोरोनाकाल में हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। दुनिया के तमाम डॉक्टर्स कोरोना वैक्सीन बनाने में लगे हुए है। हर संभव कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द वैक्सीन तैयार कर इस महामारी से निजात पाया जाए। और इसी कड़ी में एक नई उम्मीद की किरण नजर आ रही है।

डब्ल्यू एच ओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार वैक्सीन बनाने के लिए दुनियाभर में 200 से भी ज्यादा प्रोजेक्टस् पर काम चल रहा है। इसमें राहत ही बात यह है कि इसमें 21 से ज्यादा वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल पर है। वैक्सीन बनाने की दौड़ में भारत, ब्रिटेन, रूस, अमेरिका, इस्रायल और चीन आदि देश सफलता के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। इसी बीच अब कोरोना वायरस वैक्सीन का इंतजार अब खत्म होता दिखाई पड रहा है। इस बार आशा की किरण रूस से निकली है। खबरों के अनुसार रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ी एक संस्था गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित इस वैक्सीन का चार दिन बाद रजिस्ट्रेशन होने जा रहा है।

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रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने कहा है कि रूस की वैक्सीन ट्रायल में सफल रही है। उन्होंने आगे कहा कि अगले माह अक्टूबर से देश में व्यापक पैमाने पर लोगों का टीकाकरण शुरू किया जाएगा। टीकाकरण अभियान के दौरान आने वाला पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। उप स्वास्थ्य मंत्री ओलेग ग्रिदनेव ने कहा है कि 12 अगस्त को दुनिया की इस पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का पंजीकरण कराया जाएगा।

रुसे के उप स्वास्थ्य मंत्री ग्रिदनेव ने बताया कि मौजूदा समय में वैक्सीन का तीसरा और अंतिम ट्रायल चल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि वैक्सीन की प्रभावशीलता तब मापी जाएगी जब देश की जनसंख्या के अंदर बड़े पैमाने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाएगी।

बताते चले कि वैक्सीन को रूस के रक्षा मंत्रालय और गमलेया नेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ने तैयार किया है। वैक्सीन अब तक क्लिनिकल ट्रायल में सौ फीसदी सफल रही है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन रूस की इस वैक्सीन को लेकर संदेह जता चुका है। ब्रिटेन ने तो रूस की इस वैक्सीन का प्रयोग करने से इनकार तक कर दिया है। केवल ब्रिटेन और अमेरिका ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों के विशेषज्ञ भी इस वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं।