Google initiative: earthquake early warning alert system

दुनिया

Google initiative: earthquake early warning alert system

बारिश, सूखा, बाढ़ ,उल्कापिंड ,ज्वालामुखी, चक्रवात शायद ऐसी कोई प्राकृतिक घटना रही है जिसकी भविष्यवाणी विज्ञान के जरिए नहीं की जा सकती, लेकिन सिवाय भूकंप के …क्योकि भुकंप ऐसी घटना है जिसकी भविष्यवाणी करना 21वीं सदी के विज्ञान के लिए भी बेहद मुश्किल डगर। हालाकि अब गूगल ने बीड़ा उठाया है कि पहले अमेरिका, मैक्सिको और जापान और उसके बाद पूरी दुनिया में अर्थक्वेक अर्ली वार्निंग सिस्टम के शुरुआत एंड्राइड एप्लीकेशन के जरिए की जाएगी।

दुनिया के 90% स्मार्टफोन गूगल के एंड्रॉयड सिस्टम पर चलते हैं

एंड्राइड सिस्टम में अनेक तरह के सेंसर होते हैं

गूगल की कोशिश है कि इन सभी स्मार्टफोन को मिनी सेक्समो मीटर में तब्दील कर दिया जाए

इसके जरिए सबसे पहले P वेब की जानकारी स्मार्टफोन से लगाई जा सकती है

पी के बाद एस और अंत में एल वेव आती है, जिसकी रफ्तार पहले की तुलना में कम होती है

इस पूरी सिस्टम से भूकंप आने से कुछ मिनट पहले ही अर्ली वार्निंग अलर्ट भेजा जा सकता है
एंड्राइड एप्लीकेशन में मौजूद सिस्टम के अलावा गूगल की कोशिश है कि अर्थ सेंसर ‌,सैटलाइट सेंसर और महासागरों के अंदर इंटरनेट पहुंचाने वाली सबमरीन केबल से भी सूचनाओं को इकट्ठा किया जाए जिससे भूकंप की भविष्यवाणी सटीक तौर पर करना मुमकिन हो सकता है।
गूगल की बेमिसाल तकनीक और एंड्राइड सिस्टम के बावजूद भूकंप की भविष्यवाणी बेहद मुश्किल है, क्योंकि भूकंप धरती के अंदर 10 किलोमीटर से लेकर 300 किलोमीटर एपीसेंटर से शुरू हो सकता है, जबकि पृथ्वी के टेक्टोनिक प्लेट में इसका अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है। भूकंप को नापने वाली पी, एस और एल वेव कई किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती है ,लिहाजा अनुमान अगर लगाया भी जा सका तो यह महल 1 से 2 मिनट का ही होगा।
अगर यह मान भी लिया जाए कि भूकंप की भविष्यवाणी कुछ ही समय पहले की जा सकती है फिर भी फौरी तौर पर बड़े भूकंप में हजारों जान बचाना इस तकनीक के जरिए मुमकिन हो पाएगा, क्योंकि जैसे ही एक क्षेत्र के सभी स्मार्टफोन में भूकंप का अलर्ट पहुंचेगा। उसी समय लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकते हैं, यानी 1 मिनट में हजारों जान बचना संभव है।