बजट में सरकार ने हेल्थ सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खासा जोर दिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को संसद में देश का केंद्रीय बजट 2021-22 पेश कर दिया है. कोरोनावायरस के बाद उबर रही अर्थव्यवस्था के बीच वित्तमंत्री ने कहा कि इस बार का बजट आपदा में अवसर ढूंढने वाला है. उन्होंने कहा कि इस बजट को इस फोकस के साथ तैयार किया गया है कि यह अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों को सहारा दे.
बजट हेल्थ केयर पर केंद्रित, MSME पर भी फोकस- पीएम मोदी


पीएम मोदी ने कहा, ऐसे बजट कम ही देखने को मिलते हैं जिसमें शुरू के एक-दो घंटों में ही इतने सकारात्मक रिस्पांस आए. इस बजट में MSME और इंफ्रास्ट्रक्टर पर विशेष जोर दिया गया है. ये बजट जिस तरह से हेल्थ केयर पर केंद्रित है वो भी अभूतपूर्व है. इस बजट में दक्षिण के हमारे राज्य, पूर्वोत्तर के हमारे राज्य और उत्तर में लेह-लद्दाख जैसे क्षेत्रों में विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है.
इस बजट में सरकार ने हेल्थ सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खासा जोर दिया है. हेल्थ सेक्टर के बजट को 94,000 करोड़ से बढ़ाकर 2.38 लाख करोड़ कर दिया गया है. सीतारमण ने बजट में कोरोनावायरस के खिलाफ टीकाकरण के लिए 35,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है. वहीं रोड और हाइवेज़ को लेकर भी कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं. इनकम टैक्स, जिसपर सबकी नजर रहती है, उस क्षेत्र में बस एक बड़ी घोषणा हुई है, वो यह कि अब 75 साल से ऊपर के ऐसे लोग, जिनकी आय बस पेंशन या ब्याज से होती है, उन्हें अब टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करना होगा.


सरकार ने इस बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई खास घोषणा नहीं है, ऐसे में यह बजट आम आदमी को कैसे राहत देता है, यह सवाल पूछे जाने पर वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार रोजगार पैदा करने पर फोकस कर रही है. साथ ही कई इंसेंटिव स्कीम भी लाए गए हैं. उन्होंने कहा कि डिमांड बढ़ाने के लिए राहत भरे कदम लाए गए हैं, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी.
अगले वित्त वर्ष के लिए पर्यटन मंत्रालय का बजटीय आवंटन 2,500 करोड़ रुपये से घटा कर 2026.77 करोड़ रुपये कर दिया गया है. कोरोना वायरस महामारी के कारण भारी नुकसान का सामना कर रहे उद्योग ने इस पर निराशा जतायी है. इससे पहले मंत्रालय के लिए संशोधित अनुमान 1,260 करोड़ रुपये था. बजट में पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1088.03 करोड़ रुपये के प्रावधान किए गए हैं.
सरकार ने जिस तरह राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित किया है, उससे यह बात साफ है. वित्त मंत्री के बजट में ऐसा कोई नया टैक्स नहीं लगाया जिसका निवेशकों, कारोबारियों या करदाताओं पर नकारात्मक असर हो. यही वजह रही कि शेयर बाजार भी बम-बम करता नजर आया और निवेशकों की दौलत एक ही दिन में 6.8 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई. वित्त मंत्री ने फॉर्म क्रेडिट लिमिट को 16.5 लाख करोड़ रुपये करके किसानों को एक अहम संदेश देने की पहल की. हालांकि, वेतनभोगी करदाताओं का इंतजार एक साल और बढ़ गया. यानी, करदाताओं की जेब पर किसी भी तरह की राहत नहीं दी गई.

वित्त मंत्री ने बजट में 6 पिलर्स के नाम, स्वास्थ्य और कल्याण, भौतिक और वित्तीय पूंजी, और अवसंरचना, आकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास, मानव पूंजी में नवजीवन का संचार करना, नवप्रवर्तन और अनुसंधान एवं विकास और न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन, गिनाए. बजट में आयकर दाताओं को बजट में किसी भी तरह अहम राहत का एलान नहीं किया गया है. इनकम टैक्स स्लैब में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है.
बजट में 16.5 लाख करोड़ रुपये का लोन किसानों को मिलेगा: कृषि मंत्री
बजट 2021 पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है, आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किया गया आम बजट देश के इतिहास में अब तक का पहला ऐसा बजट है जिसने इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी है. इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के कारण अन्य सेक्टरों को भी फायदा होगा.
सभी वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला बजट- जेपी नड्डा
बजट 2021 पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, यह बजट सभी वर्गों, बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं, संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, छोटे बड़े उद्योगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने वाला बजट है.
बजट का बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य क्षेत्र को दिया- वित्त मंत्री
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, बजट का बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य क्षेत्र को दिया गया है परन्तु इसका मतलब यह नहीं है कि बजट में कृषि को जगह नहीं मिली. NABARD के लिए आवंटन बढ़ाया गया है ताकि किसानों तक ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, इस बजट में 16.5 लाख करोड़ रुपये का ऋण किसानों को मिलेगा. APMC सशक्त हो सकेंगे,

बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर वहां खड़े हो सकेंगे, इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्टर फंड में APMC को शामिल किया गया है. कृषि सुधार बिलों की दृष्टि से जिन लोगों के मन में शंका है वो इस बजट से निर्मूल हो जानी चाहिए. इस बजट में MSP के प्रति प्रतिबद्धता भी जाहिर की है और APMC को सशक्त बनाने की दृष्टि से भी सरकार ने ध्यान रखा है.

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बजट वर्ष 2021-2022 की सराहना करते हुए कहा कि देश का यह पहला डिजिटल बजट है और इस बजट में डिजिलाइजेशन को बढ़ावा दिया है,

जिससे पारदर्शी को व्यवस्था को बल मिलेगा। क्योंकि सारी चीजें डिजिटल फार्म में आने से कार्यप्रणाली में सुगमता आने के साथ-साथ सही तथ्य सामने आयेंगे और इससे भ्रष्टाचार रूकेगा। राज्यपाल ने कहा कि कोरोना काल में विकासोन्मुख एवं व्यवहारिक बजट प्रस्तुत किया गया है, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र के लिए रूपये 15,700 करोड़ का प्राविधान भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ ही रोजगार के नए अवसर के द्वारा प्रधानमंत्री जी के “आत्मनिर्भर भारत” की संकल्पना को साकार करेगा। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए निजी तथा व्यावसायिक वाहनों के लिए वाहन स्क्रेपिंग पाॅलिसी की घोषणा बजट में की गयी है जिससे वाहन दुर्घटना रोकने तथा पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
राज्यपाल ने कहा कि बजट में सबको शिक्षा देने की व्यवस्था है। इसके तहत आदिवासी इलाकों में 750 एकलव्य स्कूल, उच्च शिक्षा के लिए कमीशन, अनुसूचित जाति के लिए 4 करोड़ विद्यार्थियों पर 35 हजार करोड़ की व्यवस्था, देशभर में 100 नए सैनिक स्कूलों को खोलना, तकनीकी शिक्षा पर विशेष बल, लेह में सेंट्रल यूनिवर्सिटी आदि ऐसे प्रावधान है जिनसे शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को भी बजट में विशेष प्राथमिकता दी गयी हैं किसानों की आय दोगुना करने के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से डेढ़ गुना किया जाना, कृषि ऋण बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ करना, कृषि उत्पाद विक्रय हेतु 31 हजार नयी मंड़िया खोलने की व्यवस्था आदि उपायांे से स्पष्ट हैं कि बजट में अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित तथा उनकी आमदनी दोगुनी करने का प्रयास किया गया है।
श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ये बजट आपदा में अवसर की तरह है क्योंकि बजट में हेल्थ सेक्टर के लिये प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना लाँच की गयी है। कोरोना वैक्सीन के लिये 35 हजार करोड़ रूपये की व्यवस्था है स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करानें के जल जीवन मिशन (शहरी) की घोषणा हुई हैं इससे घरेलू नल कनेक्शन और सुलभ जल आपूर्ति की व्यवस्था हो सकेगी। इसके साथ ही बुजुर्गों को बड़ी राहत दी गयी है। 75 साल के पेन्शन भोगियों को टैक्स रिटर्न नहीं भरना होगा। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के लिये 16.31 प्रतिशत वृद्धि के साथ 24,435 करोड़ रूपये की धनराशि निर्धारित की गयी है इससे सक्षम आंगनवाड़ी और मिशन पोषण 2.0 जैसी योजनाओं को गति प्रदान करने में मदद मिलेगी।
राज्यपाल ने कहा कि ये बजट भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनायेगा क्योंकि प्रस्तुत बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है जिसमें कृषक कल्याण, आत्मनिर्भर भारत, सबका साथ सबका विकास एवं स्वस्थ भारत-स्वच्छ भारत का संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है। अतः ये बजट लोगो के जीवन में बदलाव लाने वाला है, क्योंकि इसके दिल में कृषक और गांव है तथा बजट में देश के हर नागरिक की प्रगति शामिल है। निश्चय ही यह बजट जनकल्याणकारी, व्यवहारिक तथा देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनायेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने संसद में प्रस्तुत किये गये वित्तीय वर्ष 2021-22 के केन्द्रीय बजट का स्वागत करते हुए कहा कि यह बजट 135 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं पर केन्द्रित है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जब दुनिया की अधिकतर अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुईं, ऐसे में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में आज केन्द्र सरकार द्वारा विकासोन्मुखी एवं रोजगारपरक बजट प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने देश की उम्मीदों को पूरा करने वाले इस बजट के लिए प्रधानमंत्री जी का अभिनन्दन किया है।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मंत्र पर यह बजट खरा उतरेगा। यह सर्वसमावेशी, सर्वकल्याणकारी और समाज के प्रत्येक तबके के हितों का संवर्धन करने वाला बजट है। इस बजट में किसानों, नौजवानों, महिलाओं, गरीबों व समाज के प्रत्येक तबके के लिए बहुत सारे प्रावधान किये गये हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत के इतिहास का यह पहला पेपरलेस बजट, नये भारत की नयी अर्थनीति के अनुरूप आमजन की आशा और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस बजट के लागू होने से देश में आर्थिक उन्नति आएगी। यह बजट भारत को दुनिया की एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने का कार्य किया है। इस बजट में कृषि के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि के लिए कई अहम प्रावधान किये गये हैं। किसानों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए बजट में 16.5 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। किसानों की सुविधा के लिए 1,000 अतिरिक्त मण्डियों को ई-नाम के साथ जोड़ने से किसानों को उनकी उपज का डेढ़ गुना दाम मिलने की गारण्टी होगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एम0एस0एम0ई0 सेक्टर को निवेश और रोजगार सृजन का इंजन बनाया जाएगा। वर्ष 2021-22 के केन्द्रीय बजट में एम0एस0एम0ई0 सेक्टर का आवंटन दोगुना किया जाना तथा स्टार्टअप उद्यमशीलता को बढ़ावा देना अभिनन्दनीय है, इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि बजट में 07 मेगा टेक्सटाइल पार्काें की स्थापना स्वागत योग्य है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिलाओं के लिए संचालित स्टैण्डअप इण्डिया स्कीम में मार्जिन मनी को घटाकर 15 प्रतिशत किये जाने से उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलेगा और स्वरोजगार के नये अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेण्ट, राजमार्गाें के विस्तार, रेलवे इन्फ्रा को एक नई गति देने, ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए इस बजट में किये गये नये प्रयास देश का ध्यान आकर्षित करते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में हाइड्रोजन इनर्जी मिशन की घोषणा इस क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन का कारण बनेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन तथा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण की दृष्टि से जो कार्ययोजना इस बजट में प्रस्तुत की गयी है, वह अभिनन्दनीय है। जल जीवन मिशन, जो अब तक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ही था, के साथ शहरी क्षेत्रों को शामिल करना स्वागत योग्य है। इसी तरह बजट में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के पार्ट-2 के लिए व्यवस्था किया जाना सराहनीय है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन करने तथा अनुसूचित जाति के बच्चों को स्कॉलरशिप देने के सम्बन्ध में बजट मंे की गयी घोषणाएं स्वागत योग्य हैं। इनके अच्छे परिणाम भविष्य में मिलेंगे। अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए अतिरिक्त एकलव्य विद्यालयों की स्थापना एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि देश में 100 सैनिक स्कूलों की स्थापना से सम्बन्धित बजट में की गयी घोषणा अत्यन्त सराहनीय है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बजट को पेपरलेस फॉर्म में प्रस्तुत करने के साथ-साथ जनगणना को डिजिटल फॉर्म में संचालित किये जाने का निर्णय प्रधानमंत्री जी के ‘मिनिमम गवर्नमेण्ट, मैक्सिमम गवर्नेन्स’ संकल्प को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल जनगणना के माध्यम से सभी तथ्य डिजिटल फॉर्म में आएंगे। यह अत्यन्त सुविधाजनक और व्यावहारिक होगी। अब देश के समक्ष सही तथ्य और आंकड़े आ सकेंगे।

इस बजट का सार है ‘धोखा’: कांग्रेस
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, इस बजट का सार है ‘धोखा’. यह धोखेबाज बजट है. केंद्र सरकार ने रक्षा बजट नहीं बढ़ाया। जिस प्रकार से राजकोषीय और वित्तीय घाटा लगभग 9.5-10% तक पहुंच गया है, यह निवेशक और अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की बड़ी घंटी है.
बजट में केंद्र सरकार ने दिल्ली के साथ धोखा किया- मनीष सिसोदिया
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, बजट में केंद्र सरकार ने दिल्ली के साथ धोखा किया है. दिल्ली को सिर्फ 325 करोड़ रुपये दिए हैं. दिल्ली को पिछले 17 सालों से केंद्र सरकार 325 करोड़ रुपये देती आई हैं. एक रुपये भी नहीं बढ़ाया. उम्मीद थी कोरोना काल में पैसा बढ़ाकर दिया जाएगा.


मध्यम वर्ग को निराश करने वाला बजट, व्यापारियों को कोई राहत नहीं- फैम
फेडरेशन आफ आल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव वीके बंसल का कहना है कि कुल मिलकर यह बजट मध्यम वर्गीय जनता, जिसमें खुदरा व्यापारी भी शामिल हैं, के लिए निराशा वाला बजट रहा है. बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे उपभोक्ता के हाथों में क्रय शक्ति की वृद्धि हो. इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ने से कॉर्पोरेट एवं कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा. व्यापारियों को ना तो कोई कर छूट मिली है न बैंक के ब्याज में कोई छूट दी गई है. जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट में अब बहुत ज्यादा वर्किंग कैपिटल के ब्लॉक होने की सम्भावना है क्योंकि विक्रेता द्वारा GSTR-1. दाखिल करने पर ही अब इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा. 13 विनिर्माण क्षेत्रों में अगले पांच सालो में 1.97 लाख करोड़ का उत्पादन प्रोत्साहन देने की घोषणा की है. सरकार संगठित क्षेत्र को प्रोत्साहन देकर रोजगार बढ़ाना चाहती है. सरकार यह भूल रही है कि असंगठित क्षेत्र 90% रोजगार देता है जबकि संगठित क्षेत्र मात्र 10% रोजगार के अवसर पैदा करता है. दुर्भाग्य से सरकार ने 90% वर्ग के विषय में बजट में कोई प्रावधान नहीं किया.


समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि केन्द्रीय वित्तमंत्री के बजट में गरीबों, महिलाओं, किसानों, नौजवानों और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत के नाम पर कुछ मिला नहीं, कर्ज और राष्ट्रीय सम्पत्ति बेचकर सत्ता सुख भोगने का जुगाड़ अवश्य करने की साजिश को परवान चढ़ाया गया है। यह बजट दिशाहीन और निराशाजनक है। डबल इंजन की सरकार को भी एक तरह से झटका दिया गया है। क्या इस बजट से 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बन सकेगी?
भाजपा सरकार ने इस बजट के माध्यम से कई राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों के लिए थोथे वादों का पिटारा खोला है और कारपोरेट घरानों को देश-प्रदेश का भाग्य नियंता बनाया गया है। रेल, रोड, पुल, बीमा, बंदरगाह, एयरपोर्ट और बैंक तक को बेचने की तैयारी है। 100 सैनिक स्कूल खुलेंगे उनमें भी एनजीओ का सहयोग लेने की बात है। प्रच्छन्नरूप से आरएसएस को इसमें भागीदार बनाने का यह षडयंत्र है।
किसानों से तो भाजपा का बैरभाव पुराना है। किसान दिल्ली बार्डर पर महीनों से आंदोलनरत है। लगभग 200 किसान शहीद हो गए है। किसान एमएसपी की अनिवार्यता और कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे है। भाजपा सरकार को उनकी मांगे मान लेनी चाहिए। देश की जनता की भावनाएं किसानों के साथ हैं। जनता जानती है कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ खेती है। भाजपा सरकार जितनी मदद उद्योगपति मित्रों की कर रही है, उतनी किसानों की कभी नहीं रही। भाजपा सरकार के बजट में उनकी कोई चर्चा नहीं, उनकी मांगो पर कुछ नहीं कहा। भाजपा की संवेदनहीनता की यह पराकाष्ठा है।
बजट में कृषि के काम आने वाले डीजल पर 4 रूपये और पेट्रोल पर 2.50 रूपये प्रति लीटर कृषि सेस लगा दिया गया है। यूरिया, डीएपी खाद मंहगी कर दी गई है। 2022 आने में दस माह ही बचे है लेकिन अभी तक किसानों की आय दुगनी करने की कोई ठोस योजना सामने नहीं आई पर कृषि सुधार का ढोंग खूब है। एमएसपी पर सरकारी रूख पूर्ववत संदिग्ध हैं किसान को सुनिश्चित आय मिलने की दिशा में कोई संकेत नहीं है। मनरेगा का जिक्र तक न होना आश्चर्यजनक है।
नौजवानों के लिए रोजगार के अवसरों पर सरकार चुप है। होटल, परिवहन, सेवा क्षेत्र, हास्पिटैलिटी सेक्टर कोरोना की मार से अभी उबर नहीं पाए हैं सरकार ने उनको कोई राहत नहीं दी जबकि वे रोजगार का बड़ा सहारा बनते हैं। पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों से यातायात और ढुलाई से माल की कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी जिससे उपभोक्ता की जेब कटेगी।
बजट से नौकरी पेशा वाले बहुत मायूस होंगे। कोरोना संकट में उनके वेतन भत्तों में पहले ही कटौती हो चुकी है। उनकी हालत सुधारने के लिए कुछ भी इस बजट में नहीं है। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ और वरिष्ठ नागरिकों को भी सिर्फ बहकाने का काम किया गया है।
भाजपा की पूंजीघरानों के प्रति पक्षपाती नीति का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कि प्रधानमंत्री जी ने नोटबंदी के समय टैक्स चोरी के मामलों के कई पुश्तों तक के रिकार्ड निकालने का वादा किया था परन्तु अब 3 साल पर आकर उनकी सुई अटक गई है। इससे पहले के कर चोर अवश्य खुशहाल रहेंगे। कारपोरेट घरानों को बराबर टैक्स में छूट दी जाती रही है जबकि आम आदमी 35 प्रतिशत टैक्स अदा कर रहा है।
समझ में नहीं आता कि एक हजार मंडियों को ई-नाम के साथ जोड़कर क्या फायदा होगा? पेपरलेस बजट और डिजिटल जनगणना दिल बहलाने को अच्छा ख्याल है। लाकडाउन में जिनका रोजगार छिना उनके पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं। गांव-गरीब के लिए कुछ भी नहीं। भाजपा सरकार के निजीकरण से गरीबों, पिछड़ों और दलितों का आरक्षण स्वतः समाप्त हो जाएगा।
सच तो यह है कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय सम्पत्तियों को बड़े पूंजीघरानों के हाथों में बंधक रखने के साथ उनकी खुशहाली के सभी सम्भव रास्ते खोलने का संकल्प लिया है। वह खेती-गांव गरीब का सफाया करने पर तुली है। देश की विकास दर में भारी गिरावट है और अर्थव्यवस्था संकट में है। नोटबंदी, जीएसटी और कोरोना महामारी ने तबाह कर दिया है। इससे उबारने की जगह और ज्यादा गर्त में डालने का काम भाजपा ने किया है।
भाजपा सरकार से बजट में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द, किसान-मजदूर के सम्मान, महिला युवा के मान और अभिव्यक्ति की पुनस्र्थापना के लिए कुछ प्रावधान किए जाने की अपेक्षा थी किन्तु भाजपा ने अपनी कुनीतियों से इन सबकों खण्डित करने का काम किया है।

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