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मेरठ में चार आशा कार्यकत्रियों में डेल्टा प्लस वैरियंट मिलने से उत्तर प्रदेश के मेरठ में सनसनी फैल गई है.

मेरठ में चार आशा कार्यकत्रियों में डेल्टा प्लस वैरियंट मिलने से उत्तर प्रदेश के मेरठ में सनसनी फैल गई है.

कोरोना की दूसरी लहर कहर मचाने के बाद कुछ थमी और देश अनलॉक की ओर बढ़ना शुरू हुआ. इसी दौरान कोरोना के दूसरे स्वरूप डेल्टा प्लस वैरिएंट की दहशत अब लोगों में बैठनी शुरू हो गई. मेरठ (meerut) में चार आशा कार्यकत्रियों में डेल्टा प्लस वैरियंट मिलने से उत्तर प्रदेश के मेरठ में सनसनी फैल गई है. डेल्टा प्लस वैरिएंट के एक साथ चार केस मिलने से चिकित्सा विभाग में हलचल मच गई है. जिन चार आशा कार्यकत्रियों में डेल्टा वैरिएंट मिले हैं, वे बिजौली गांव में तैनात हैं. इनके सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पुणे लैब भेज दिए गए हैं.
वहीं, डेल्टा प्लस के बारे में चिकित्सकों का कहना है कि दूसरी लहर में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने कहर मचाया था. डेल्टा प्लस उसी डेल्टा वैरिएंट का ही बदला स्वरूप है, जो कि डेल्टा से कई गुना घातक है.
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलोजी लैब के जरिए 200 सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे हैं. इस बारे में सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि जिले में डेल्टा प्लस वैरिएंट कहीं भी संक्रमित हो सकता है. जिले के विभिन्न हिस्सों में मिले मरीजों का सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नेशनल इंस्टीटयूट आफ पुणे भेजा गया है. मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलोजिस्ट डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट देश में पहले से है. इसी के चलते दूसरी लहर में इतनी तबाही मची थी लेकिन इसमें बदलाव होना खतरनाक है. यह बदलाव अब डेल्टा प्लस के नाम से जाना जा रहा है. मेडिकल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एसके गर्ग का कहना है कि मोनोकोनल एंटीबाडी इस पर काम नहीं करती है. वायरस के स्पाइक प्रोटीन में बदलाव से कोशिकाओं में तेज प्रवेश करता है.

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