विशेष सचिव स्तर के आईएएस अफसरों को शासन ने फिर भेजा कोरोना की रोकथाम हेतु जिलो में।

उत्तर प्रदेश लखनऊ

लखनऊ :

विशेष सचिव स्तर के आईएएस अफसरों को शासन ने फिर भेजा कोरोना की रोकथाम हेतु जिलो में।

प्रमोटी अधिकारियों में पुनः भेजे जाने को लेकर है नाराजगी ।

आयुष विभाग के विशेष सचिव तक को भेज दिया गया फील्ड में ।

अंदर खाने प्रमोटी आईएसएस अफसरों में नाराजगी के स्वर दिखाई देने लगे है,लिस्ट में कई ऐसे भी अफसर है जो जिलो में कलेक्टर रह कर अच्छा कार्य कर चुके है।

लिस्ट के अधिकतर अधिकारियों ने इस भेदभाव को लेकर गुपचुप चर्चा, सीएम योगी से उम्मीद कि मुख्यमंत्री उनकी सुनेंगे, फरियाद

अनिश्चितकालीन ड्यूटी को लेकर अधिकारियों में मची है बेचैनी ।

प्रदेश के समस्त 18 मंडलों में कोरोना वायरस से प्रभावित मरीजों के उपचार इसके संक्रमण के प्रसार के रोकथाम आदि हेतु संबंधित मंडलायुक्त के नियंत्रणाधीन किये गए 75 आईएएस व पीसीएस अफसरों में रोष है. 

सरकार व पंचम तल के इस फैसले को लेकर नाराजगी की वजह जो चर्चा में है वह यह कि अफसरों की उपलब्धता होने के बावजूद पुनः उन्हीं अफसरों को जिलों में तैनाती दिया जाना जोकि अभी हाल ही में जिलों से इस ड्यूटी को निभाकर लौटे हैं. अफसर पंचमतल के इस फैसले को नैसर्गिक सिद्धांत के खिलाफ बता रहे हैं.
दूसरा यह कि बराबरी का दर्जा रखने व जिलों में जिलाधिकारी के पदों को सुशोभित करने वाली एक भी महिला अफसर का नाम इस लिस्ट में और न ही पहले की लिस्ट में शामिल न किया जाना है.

जानकारों की माने तो सीधी सेवा के आईएएस अफसरों  की संख्या का इस सूची में नाममात्र यानी करीब 10 से कम होना भी इस नाराजगी की वजह बताई जा रही है. इस तरह सरकार व पंचमतल के इस फैसले पर खुद अफसर ही दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैं. फिलहाल अफसरशाही में यह मामला दिलचस्प हो चला है अब देखना यह होगा कि यह अफसरों के बीच चल रही यह कसमकस गम्भीर रूप लेती है या फिर सरकार कुछ बीच का रास्ता निकलती है.

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