छठ के पारंपरिक पकवानों की खुशबू से महक उठे घर

छठ पर्व के निकट आते ही घरों में पारंपरिक पकवानों की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे पूरे मोहल्ले में उत्सव की खुशबू फैल गई है। ठेकुआ, खीर और फलों की टोकरियां सजाने का काम परिवार के सभी सदस्य मिलकर करते हैं, जिसमें बुजुर्गों का अनुभव और युवाओं का उत्साह दोनों देखने को मिलता है। महिलाएं सुबह से ही साफ-सफाई और पकवान बनाने में जुट जाती हैं, क्योंकि इस पर्व में शुद्धता को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। बाजारों में भी बांस की टोकरियों, सूप और मौसमी फलों की मांग बढ़ गई है, जिससे स्थानीय विक्रेताओं को भी अच्छा कारोबार मिल रहा है। बच्चे अपने बड़ों से पर्व की कहानियां सुनते हैं और टोकरियां सजाने में मदद करते हैं। कई परिवार इस अवसर पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों को भी प्रसाद बांटते हैं, जिससे आपसी प्रेम और मेलजोल बढ़ता है। छठ को सूर्य उपासना का पर्व माना जाता है, जिसमें व्रत रखने वाले कठिन नियमों का पालन करते हैं। घाटों की सफाई और सजावट का काम भी साथ-साथ चल रहा है। लोगों का कहना है कि यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार को एक साथ जोड़ने का अवसर भी है।



