बागपत बड़ागांव की रावण परंपरा हर साल चौंकाती है

दशहरे की परंपराओं की बात हो तो बागपत के बड़ागांव की परंपरा हर साल लोगों को चौंकाती है। देश के अधिकांश स्थानों पर जहां रावण दहन होता है, वहीं इस गांव में दशहरे पर रावण का दहन नहीं होता। गांव की पहचान रावण से जुड़ी बताई जाती है, इसलिए यहां की परंपरा बाकी जगहों से अलग दिखाई देती है। मां मनसा देवी मंदिर से जुड़ी मान्यता इस परंपरा की जड़ मानी जाती है और गांव के लोग इस मान्यता को पूरे सम्मान के साथ निभाते हैं। हर साल जब दशहरे की तैयारियां होती हैं, तो बड़ागांव की यह अलग परंपरा चर्चा में आ जाती है। बाहर से आने वाले लोग भी इस परंपरा को जानकर हैरान रह जाते हैं। यह परंपरा बताती है कि भारत के लोक उत्सवों में कितनी विविधता है और हर स्थान की अपनी आस्था और पहचान होती है। बड़ागांव की यह परंपरा आस्था, पहचान और लोक मान्यता का अनूठा संगम है।



