बाल यौन शोषण दोषी को अंतिम सांस तक कैद

दिल्ली की अदालत ने तेरह वर्षीय किशोर के साथ लंबे समय तक यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के दोषी व्यक्ति को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध की गंभीरता पर सख्त रुख अपनाया। अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों में सख्त सजा का संदेश देता है। दोषी को सुनाई गई सजा उसके शेष जीवन तक कारावास में रखने का प्रावधान करती है। मामले में अदालत ने अपराध की प्रकृति को गंभीर मानते हुए कड़ी सजा को उचित ठहराया। इस फैसले को बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।अदालत ने सुनवाई के दौरान अपराध की गंभीरता को देखते हुए नरमी बरतने से इनकार किया। सजा का अर्थ है कि दोषी व्यक्ति अपने जीवन की अंतिम सांस तक जेल में रहेगा। अदालत के सख्त रुख से स्पष्ट है कि बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराधों में न्यायपालिका कठोर दंड के पक्ष में है।लंबे समय तक चले शोषण और ब्लैकमेलिंग को अदालत ने अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा।



