मिड डे मील से बच्चों के पोषण पर असर

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील के लिए धनराशि लंबे समय से बकाया होने का सीधा असर अब स्कूली बच्चों के पोषण पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कई विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था उधारी और शिक्षकों के निजी खर्च से चल रही है, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं मानी जा सकती।
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के बच्चों के लिए नियमित और संतुलित आहार बेहद जरूरी है। पौष्टिक भोजन न सिर्फ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि स्कूलों में उनकी उपस्थिति बनाए रखने में भी इसकी अहम भूमिका होती है।
मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य ही यह रहा है कि कोई बच्चा भूख के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे और विद्यालय आने के लिए प्रोत्साहित हो। ऐसे में धन की देरी से योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षक संगठनों और अभिभावकों की ओर से इस समस्या के शीघ्र समाधान की मांग तेज हो गई है। सबकी अपेक्षा है कि बकाया राशि जल्द जारी हो, ताकि बच्चों को निर्बाध रूप से पौष्टिक भोजन मिलता रहे।



