राकिया मामले में भारत की अपील इंग्लैंड कोर्ट ने खारिज की

इंग्लैंड की अपील अदालत ने रास अल खैमा निवेश प्राधिकरण से जुड़े विवाद में भारत की चुनौती को खारिज कर दिया है। यह मामला भारत-संयुक्त अरब अमीरात द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत मध्यस्थता न्यायाधिकरण के क्षेत्राधिकार को लेकर था। विवाद आंध्र प्रदेश में एल्युमीनियम परियोजना के लिए बॉक्साइट आपूर्ति समझौते के रद्द होने से जुड़ा है, जिसमें राकिया और पेन्ना समूह शामिल हैं।
अदालत के इस फैसले के बाद मध्यस्थता की कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला अंतरराष्ट्रीय निवेश विवादों में भारत की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आगे की कानूनी रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
राकिया ने दावा किया था कि समझौता रद्द होने से उसके निवेश को नुकसान पहुंचा है। इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के जानकारों की नजर टिकी है, क्योंकि यह विदेशी निवेशकों के लिए भारत के कानूनी माहौल का संकेत देता है। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्कों पर विस्तार से विचार होगा।



