शुरुआती कारोबार में रुपया गिरकर 94.50 पर पहुंचा

बाईस अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में रुपया बारह पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले चौरानवे दशमलव पांच शून्य पर पहुंच गया। घरेलू शेयर बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाया। वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल और तेल से मिले-जुले संकेतों के बीच मुद्रा बाजार में सतर्कता देखी गई।
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की महंगाई से आयात बिल बढ़ने और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इससे रुपया कमजोर होता है और विदेशी निवेशकों की धारणा भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने और डॉलर के नरम पड़ने पर ही रुपये को राहत मिलेगी। आयातकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। रुपये की कमजोरी से विदेश में पढ़ने वाले छात्रों और विदेश यात्रा करने वालों का खर्च भी बढ़ जाता है। निर्यातकों को कुछ फायदा होता है, लेकिन समग्र अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। रिजर्व बैंक बाजार में उतार-चढ़ाव को थामने के लिए हस्तक्षेप करता रहता है।



