भाषिनी ने सौराष्ट्र भाषा के लिए वाणी मॉडल तैयार किया

नई दिल्ली। लुप्तप्राय भाषाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल हुई है। डिजिटल इंडिया भाषिनी ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के सहयोग से सौराष्ट्र भाषा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टेक्स्ट-टू-स्पीच मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल को वाणी नाम दिया गया है।
सौराष्ट्र भाषा मुख्य रूप से तमिलनाडु में रहने वाले समुदाय द्वारा बोली जाती है और समय के साथ इसके बोलने वालों की संख्या घटती जा रही है। आवाज आधारित यह तकनीक लिखित सामग्री को सौराष्ट्र भाषा में सुनने योग्य बनाएगी, जिससे भाषा का संरक्षण भी होगा और इसके बोलने वालों तक सूचनाएं उनकी अपनी भाषा में पहुंच सकेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मॉडल से सार्वजनिक सेवाएं आवाज के माध्यम से उन लोगों तक पहुंचेंगी, जिन्हें पढ़ने-लिखने में कठिनाई होती है। भाषिनी का यह प्रयास भारतीय भाषाओं के डिजिटल समावेशन की दिशा में अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तकनीक के विस्तार से और अधिक क्षेत्रीय तथा लुप्तप्राय भाषाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।



