Breaking News
‘वैश्विक माहौल में उथल-पुथल’: भारत-यूरोपीय संघ ‘ऐतिहासिक’ एफटीए के बाद पीएम मोदी की ‘डबल इंजन’ पिचनासा ने डार्क मैटर: ब्रह्मांड के छिपे ढांचे के बारे में नई जानकारी साझा की है।अमेरिका में शीतकालीन तूफ़ान का कहर: कम से कम 30 मरे, पांच लाख से अधिक बिजली के बिना – वह सब जो आपको जानना आवश्यक हैअमेरिका में बर्फ़ीला तूफ़ान: विभिन्न क्षेत्रों में सर्दी के मौसम के भीषण प्रकोप से कम से कम 25 लोगों की मौत; 750,000 बिजली के बिना रह गएकनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च में भारत आने की संभावना: एजेंडे में यूरेनियम, व्यापार समझौता; चीन की धुरी के कुछ दिनों बाद आता है‘जो भी उनके खिलाफ आएगा वह पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा’: टी20 विश्व कप से पहले भारत के अपराजेय दिखने पर इरफान पठान ने दुनिया को दी चेतावनी | क्रिकेट समाचारज़मीन में निवेश करने से पहले जानने योग्य 8 महत्वपूर्ण बातेंलाल झंडों के बावजूद, कर्नाटक ने बेंगलुरु में 22 दलित और ओबीसी मठों को 255 करोड़ रुपये की जमीन दी। बेंगलुरु समाचारचीन के शीर्ष जनरल पर आधिकारिक पदोन्नति के बदले अमेरिका को परमाणु रहस्य लीक करने का आरोप: रिपोर्टअभिषेक शर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे तेज अर्धशतक लगाकर इतिहास रचा, एलीट क्लब में शामिल हुए | क्रिकेट समाचार

फलस्तीन से जुड़े प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान हुआ

Follow

Published on: 19-09-2024
 

संयुक्त राष्ट्र: एक तरफ जहां इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध की संभावना बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बुधवार को एक गैर-बाध्यकारी फिलिस्तीनी प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि इजरायल एक साल के भीतर गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अपनी ‘अवैध उपस्थिति’ खत्म करे। इस बीच, यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में इस प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

इन देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया

बुधवार को पारित प्रस्ताव में मांग की गई कि “इज़राइल बिना किसी देरी के और वर्तमान प्रस्ताव को अपनाने के 12 महीने के भीतर कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र में अपनी अवैध उपस्थिति को हटा ले।” 193 सदस्यों वाली महासभा में 124 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि 14 ने इसके खिलाफ़ मतदान किया। भारत समेत 43 देशों ने मतदान से परहेज़ किया। मतदान से परहेज़ करने वालों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, इटली, नेपाल, यूक्रेन और ब्रिटेन शामिल हैं। इस प्रस्ताव के खिलाफ़ मतदान करने वाले देशों में इज़राइल और अमेरिका भी शामिल थे।

शांति और सुरक्षा को खतरा है

फिलिस्तीन द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून और प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत अपने दायित्वों के प्रति इजरायल सरकार की उपेक्षा की भी कड़ी निंदा की गई। इसने जोर देकर कहा कि इस तरह के उल्लंघन क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इसने कहा कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय कानून के किसी भी उल्लंघन के लिए इजरायल को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

 

Lokayat Darpan एक स्वतंत्र और निष्पक्ष समाचार मंच है, जहाँ हर ख़बर को सत्य, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाता है। हमारा उद्देश्य है देश-दुनिया के महत्वपूर्ण मुद्दों को बेबाकी से सामने लाना और जनता की आवाज़ को सशक्त बनाना। हम राजनीति, सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, शिक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन और स्थानीय मुद्दों पर विश्वसनीय व ताज़ा अपडेट प्रदान करते हैं।
Lokayat Darpan का मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ खबरें दिखाना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और बदलाव की रोशनी फैलाना है। इसलिए हम हर खबर को बिना पक्षपात, तथ्यों और प्रमाणों के साथ प्रकाशित करते हैं।