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मां की मधुर स्मृति में हमारा गांव अयोध्या तीर्थ में- दिनेश सिंह राठौर

Published on: 06-12-2024

महराजगंज, रायबरेली। मां उस निराकार का साक्षात साकार रूप है जिसकी उपासना साधना युगों-युगों से होती चली आई है, मां में संसार समाहित है, हर एक के जीवन में मां ही एक ऐसी होती है, जो हमारे दिल में किसी और की जगह नहीं ले सकती है।

वो प्रकृति की तरह है, जो हमेशा हमको देने के लिए जानी जाती है, बदले में बिना कुछ हमसे वापस लिए मां एक ऐसी परम सत्ता है, जो भौतिक दुनिया में रहते हुए अपने आंचल से सदैव पुत्रों को अभिसिंचित करती है, यद्यपि गोलोकवासी होने के पश्चात भी मां अपने पुत्रों पर सदैव अपना वरदहस्त बनाए रखती है।

मां के लिए लिखना या मां और पुत्र के बीच वात्सल्य प्रणय रुपी संबंधों की संरचना या फिर कागज पर उसे उकेर पाना इंसान के वश में नहीं है, क्योंकि मां की महिमा असीमित, अपरिमित,अपार अंतहीन है। यह उद्गार पत्रकार वार्ता के दौरान दिनेश सिंह राठौर व्यक्त कर रहे थे तथा दिनेश सिंह राठौर ने बताया कि
विगत आठ वर्षों से आठ दिसंबर की तारीख मेरे लिए मेरी पूजनीया ममतामयी, करुणामयी, गोलोकवासी वरेण्य मां श्री छाया देवी जी की स्मृति में रहती है।

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी की प्रेरणा से प्रत्येक वर्ष अपनी जन्मभूमि अलीपुर गांव में एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम विगत वर्षों से आयोजित होता आ रहा है, उसी क्रम में इस वर्ष 500 वर्षों के संघर्ष के पश्चात भगवान श्री राम अपनी जन्मभूमि पर भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं,और इस अद्भुत अप्रतिम अलौकिक क्षण का समूचा विश्व साक्षी बना।

इस पर मेरे मन में विचार आया क्यों न अपनी जन्मभूमि के लोगों को श्री राम जी की जन्मभूमि का दर्शन कराया जाए इसी उद्देश्य से 7 दिसंबर दिन शनिवार दोपहर 12:00 बजे से श्री धाम अयोध्या के लिए बस से प्रस्थान करना है। वहां पहुंचने के पश्चात 8 दिसंबर की सुबह माता सरयू की अविरल जलधारा में स्नान छः बजे इसके पश्चात नागेश्वर नाथ का जलाभिषेक होगा एवं हनुमान गढ़ी में दर्शनोपरांत श्री राम लला सरकार के मधुरिम दर्शन इसके पश्चात हवन पूजन संत महात्माओं के आशीर्वचन अपराह्न एक बजे भंडारे में प्रसाद ग्रहण कार्यक्रम तदोपरांत दो बजे श्रीधाम अयोध्या से गांव के लिए प्रस्थान किया जायेगा।

ईश्वर का दूसरा रूप है,मां
ममता की गहरी झील है, मां
वो घर किसी स्वर्ग से कम नहीं
जिस घर में ईश्वर की तरह पूजी जाती है,

मां धरती के धैर्य सरीखी, मां ममता की खान है,
मां की उपमा केवल है, मां सचमुच भगवान है।

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