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नवजात शिशु की मौत के मामले में जांच के नाम पर हुई खाना पूर्ति

Published on: 18-12-2024

रायबरेली। खीरो थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव से आयी गर्भवती करिश्मा (23 वर्ष) ने बीते रविवार को खीरो सीएचसी में एक नवजात शिशु को मृत अवस्था में जन्म दिया। यह घटना न केवल परिवार के लिए दुःखद है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती है।

पति की शिकायत

करिश्मा के पति लवकुश ने मामले में नर्स पर आरोप लगाया है कि उसने प्रसव के दौरान लापरवाही बरती।जिससे उसके बच्चे की मौत हो गयी, लवकुश ने नाराजगी जाहिर करते हुए सीएमओ से शिकायत की है, जिसमें उन्होंने नर्स के अभद्र व्यवहार की भी शिकायत की। यह आरोप स्वास्थ्य कर्मचारियों की ओर से दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर एक महत्वपूर्ण प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

सीएमओ ने गठित की तीन सदस्यीय टीम, जांच करने पहुंचे सिर्फ एक अधिकारी

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। मंगलवार को जांच टीम में डॉ अरविंद कुमार (एसीएमओ), डॉ अनिल जैसल (सर्जन) व डॉ रश्मि पाठक (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ) का नाम शामिल था। मामले की जांच करने के लिए एसीएमओ अकेले ही सीएचसी पहुंचे।

उन्होंने बताया कि अन्य दोनों डॉक्टर की ट्रेनिंग लगी हुई है। इस कारण नहीं आ पाए हैं। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान सभी जिम्मेदार लोग मामले को दबाने में लगे हैं, जिससे यह साफ हो जाता है कि सेटिंग-गेटिंग के चलते सही निष्कर्ष नहीं निकल पा रहे हैं।

एसीएमओ ने शिकायतकर्ता का बयान लिया। शिकायतकर्ता लवकुश ने बताया कि उसकी पत्नी करिश्मा ने दुख में 24 घंटे से कुछ भी खाया- पिया नहीं है। उसकी तबीयत बहुत खराब है। लवकुश ने जांच अधिकारी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि सभी आपस में मिले हुए हैं, ऐसे में उसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवा में पारदर्शिता की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।

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