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रायबरेली: खानापूर्ति तक सीमित रहा सीएमओ का निरीक्षण

Published on: 02-09-2025
  • सेमरी पीएचसी में पांच मिनट भी नहीं रुके
  • खीरों सीएचसी में लोग इंतजार करते रह गए, सीएमओ बचते हुए निकल गए

रायबरेली। सीएचसी खीरों सहित पीएचसी एकौनी, देवगांव, सेमरी, दृगपालगंज व राजकीय महिला चिकित्सालय पाहो में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही, मनमानी और व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें उठ रहीं हैं। सीएमओ डॉ.नवीन चंद्रा ने सोमवार को एकौनी, देवगांव व सेमरी पीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचे। जिसकी सूचना पहले से थी। सीएमओ का निरीक्षण खानापूर्ति तक सीमित रहा। एकौनी की डॉक्टर छुट्टी पर रहीं।

देवगांव पीएचसी फार्मासिस्ट के भरोसे चलती मिली। सेमरी में अव्यवस्थाओं का अंबार मिला। सेमरी पीएचसी पहुंचे सीएमओ ने वहां 5 मिनट का भी समय नहीं दिया। निरीक्षण मात्र औपचारिकता तक सीमित रहा। सीएमओ के आने की सूचना मिलने पर खीरों सीएचसी में दर्जनों लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे पर सीएमओ के वहां न पहुंचने से लोग मायूस होकर लौट गए।

सीएमओ के पहुंचने पर एकौनी की डॉक्टर सदफ असगर छुट्टी पर पाई गईं। वह आए दिन लंबी छुट्टी पर रहती हैं। अधीक्षक की मिलीभगत होने की वजह से छुट्टी का कोई हिसाब नहीं है। उनकी छुट्टी है कि खत्म होती ही नहीं है। देवगांव पीएचसी फार्मासिस्ट के सहारे मिली। डॉक्टर अर्चिता वर्मा की तमाम शिकायतें पहले से हैं कि वह बिना अस्पताल आए अधीक्षक की मिलीभगत से घर बैठे वेतन ले रही हैं।

देवगांव पीएचसी के फार्मासिस्ट की भी कई शिकायतें हैं। फार्मासिस्ट हमेशा विवादों से घिरा रहता है। सेमरी पीएचसी में पहुंचे सीएमओ वहां पांच मिनट भी नहीं रुके। इससे पहले कि वहां मौजूद लोग अपनी समस्याओं के बारे में कुछ बताते, सीएमओ उन्हें अनसुना करते हुए वहां से चले गए।

हजम किया जा रहे मेंटेनेंस के लाखों-करोड़ों रूपये

सेमरी सीएचसी में महिला वार्ड में पानी भरा मिला। छत से पानी टपक रहा था। बेड पर चादरें नहीं थीं। अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार मिला। बड़ी-बड़ी घास खड़ी पाई गई। पीएचसी इंचार्ज डॉ.ओमनाथ गौतम सीएमओ के सामने अव्यवस्थाओं पर हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे। सामान्य वार्ड के अन्दर प्लास्टर गिर रहा था। और लंबे समय से पुताई नहीं हुई, ऐसा जाहिर हो रहा था।

मेंटेनेंस का पैसा तो खा लिया गया लेकिन खिड़की में शीशे नहीं थे। उस पर दफ्ती लगाई गई थी। टाइल्स और फर्श टूटे पड़े थे। वॉश बेसिन में पानी नहीं था। रोगियों को पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं थी। रोगी कल्याण समिति के बजट में सबसे ज्यादा घोटाला खीरों सीएचसी में है। अस्पताल में कुत्ते टहल रहे थे। डेंटल चेयर टूटी पड़ी थी और उस पर धूल की मोटी परत जमी थी।

दो दिन पहले ही सेमरी पीएचसी में अव्यवस्थाओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें वहां का एक रिटायर्ड वार्ड बॉय डॉक्टर के साथ मिलकर मरीजों से बाहर स्थित अपने मेडिकल स्टोर से दवाइयां मंगवा रहा था।

एकौनी की डॉक्टर हमेशा छुट्टी पर

एकौनी पीएचसी में डॉ.सदफ असगर को छुट्टी पर बताया गया। क्षेत्र के लोगों की माने तो वह अस्पताल नहीं आती हैं। अधीक्षक की मिलीभगत से पैसा लेकर घर बैठे वेतन निकाला जा रहा है। एक संविदा डॉक्टर और फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा था। अधीक्षक से पूछने पर वह जब-तब डॉक्टर के छुट्टी पर होने की बात बताते हैं। लोगों का कहना है कि आखिर डॉक्टर सदफ असगर की एक साल में कितनी छुट्टियां होती हैं कि कभी खत्म होने का नाम नहीं लेती।

ग्रामीण डॉक्टर को पहचानते तक नहीं

देवगांव पीएचसी फार्मासिस्ट के भरोसे चलती मिली। डॉक्टर के किसी ट्रेनिंग में होने की बात बताई गई। देवगांव पीएचसी में डॉ.अर्चिता वर्मा के अस्पताल न आने की अनेक बार ग्रामीणों द्वारा शिकायतें की जा चुकी हैं। आईजीआरएस पर इसकी कई शिकायतें हुई हैं। सीएचसी अधीक्षक की मिलीभगत से सारा खेल हो रहा है।

शिकायतों पर डॉक्टर को बचाते हुए रिपोर्ट लगाकर शिकायतें निस्तारित कर दी जाती हैं। फार्मासिस्ट विकास द्विवेदी आए दिन विवादों में रहता है। अपनी कार्यशैली के चलते एक महीने पहले ग्रामीणों ने फार्मासिस्ट की शिकायतें किया था। जिसे सीएचसी अधीक्षक ने पैसा लेकर दबा दिया।

सीएमओ के न पहुंचने से लोग हुए मायूस, जन औषधि केंद्र में बिक रही कमीशन की दवाएं

क्षेत्र में सीएमओ के आने की सूचना पर अपनी समस्याओं को लेकर दर्जनों लोग सीएचसी खीरों पहुंच गए। सीएचसी में व्याप्त अव्यवस्थाओं और लापरवाही को लेकर क्षेत्र के लोगों में निराशा है। प्रसव के उपरांत पैसे लेने की और जन्म प्रमाण-पत्र बनाने के नाम पर वसूली करने की शिकायतें हैं। सीएचसी के अंदर खुले जन औषधि केंद्र में कमीशन की कई सारी दवाएं बिकवाई जा रही हैं।

एक निजी कंपनी (अल्वो लाइफ साइंसेज) का टॉनिक धड़ल्ले से 130 रूपये में बेचा जा रहा है। लिवर का एक सिरप 120 रुपये में बेचा जा रहा है। मरीजों को लूटा जा रहा है। ऐसे कई मामलों की शिकायत लोग सीएमओ से करना चाहते थे, पर सीएमओ मौके से बचते हुए निकल गए।

सीएमओ का हवा-हवाई निरीक्षण अपने आप में बहुत कुछ संकेत दे रहा है। इससे लगता है कि फिलहाल खीरों सीएचसी व इसके अंतर्गत आने वाली सभी पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं के बिगड़े हुए हालात जल्द सुधरने वाले नहीं हैं। स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक चाहे जितने दावे कर लें।

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