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हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की मनाई गई जयंती

Published on: 30-08-2024

महराजगंज, रायबरेली। कस्बे के हैदरगढ़ रोड पर स्थित महावीर स्टडी इस्टेट सीनियर सेकेंडरी कॉलेज में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई गई। इस दौरान स्कूल में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने हॉकी के जादूगर के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन् किया। प्रार्थना सभा में स्कूल प्रधानाचार्य कमल वाजपेई ने बच्चों को हाकी के जादूगर ध्यानचंद के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

आपको बता दें कि, प्रधानाचार्य कमल वाजपेई ने बताया कि, हॉकी के जादूगर ध्यानचंद का जन्म 1905 में प्रयाग में पिता रामेश्वर दत्त सिंह, माता शारदा सिंह के घर में हुआ था। ध्यानचंद ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी में मेजर की नौकरी की।

ध्यानचंद ने भारत के लिए हॉकी खेली तथा ओलंपिक में हैट्रिक स्वर्ण पदक, 1928 में एम्स्टर्डम, 1932 में लांस एंजेल्स तथा 1936 में बर्लिन में भारत को अपनी कप्तानी में लगातार स्वर्ण पदक दिलाए। हॉकी के जादूगर ध्यानचंद को प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान “पद्मभूषण” से सम्मानित किया गया।

हाकी का जुनून इन पर इस कदर था कि, यह रात में चंद्रमा की रोशनी में स्टेडियम में अकेले स्टिक तथा गेंद से खेला करते थे। दोस्तों ने ध्यान सिंह के बदले इनका नाम चंद्रमा की रोशनी में खेलने के कारण ध्यानचंद्र रख दिया।
प्रधानाचार्य ने बच्चों को बताया कि, एडोल्फ हिटलर ने इन्हें जर्मनी की तरफ से प्रलोभन दिया कि, आप मेरे देश से खेले।

लेकिन इस स्वाभिमानी व्यक्ति ने अपनी मिट्टी अपने देश से ही खेलना चाहा और उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। बताते हैं कि, उनकी खेल प्रतिभा ऐसी थी कि, बाल स्टिक से हटती ही नहीं थी। लोगों को लगा की स्टिक में कुछ चुंबक लगा है। अतः उनकी स्टिक तोड़ कर देखा गया। एक बार गोल मारा तो गोल बाहर चला गया। इन्होंने गोल का साइज नापने को कहा तो वह छोटा निकला, सभी लोग इनको हाकी का जादूगर नाम से पुकारते थे।

बताया कि, आज कॉलेज के प्रिय खेल अध्यापक दिलीप गुप्ता ने ध्यानचंद पर तथा खेल भावना पर प्रकाश डाला तथा राष्ट्रीय खेल दिवस पर बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल खेलने हेतु ग्राउंड में बुलाया। प्रार्थना सभा में प्रधानाचार्य ने ध्यानचंद को काव्यांजलि अर्पित की कहा कि…..
याद करें हम ध्यानचंद को, विश्व पटल पर खेली हाकी।
दुनिया बोली जादूगर थे, टीम विरोधी धूल थी फाकी।।
⭕ नमन तुम्हें मेजर जी मेरा, खेल भावना हमें सिखा दी।
⭕ खेल तुम्हारा आकर्षण था, प्रेमी बोल हांकी-हांकी।।

इस अवसर पर गिरिजा शुक्ला, राजीव मिश्रा, सौरभ श्रीवास्तव, अनिमेष मिश्रा, सुरेंद्र प्रजापति, मंजू सिंह, सरिता मिश्रा, अनुपम सिंह, लक्ष्मी सिंह, सुमन बहादुर, राज किशोर पाल, अभिषेक राज त्रिपाठी, आदर्श शुक्ला, ज्योति जयसवाल, ज्योति सिंह, फातिमा, साधना सिंह, रुचि सिंह, शिवानी वर्मा, गर्वित सिंह, दिलीप गुप्ता, आलोक यादव, निखिल शुक्ला सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा समस्त स्टाफ मौजूद रहा।

रिपोर्ट@पवन कुमार

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