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JAMSHEDPUR : उपायुक्त ने चाकुलिया के केरूकोचा में मत्स्यपालकों से की मुलाकात, केरुकोचा में 8 प्रगतिशील किसान बड़े स्तर पर कर रहे मत्स्य पालन, उपायुक्त ने बढ़ाया उत्साह

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Published on: 28-08-2025

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए मत्स्य पालन को बताया बेहतर विकल्प, पदाधिकारियों को योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के दिए निर्देश

केरुकोचा में 8 प्रगतिशील किसान बड़े स्तर पर कर रहे मत्स्य पालन, उपायुक्त ने बढ़ाया उत्साह

जमशेदपुर (झारखंड)। चाकुलिया प्रखंड के केरूकोचा गांव में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने क्षेत्र भ्रमण के क्रम में मत्स्यपालकों से संवाद स्थापित किया। इस अवसर पर उन्होने मत्स्यपालन की तकनीकी जानकारी ली और इस व्यवसाय के बारिकियों को जाना। गौरतलब है कि केरूकोचा के 8 प्रगतिशील किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर बड़े स्तर पर मत्स्य पालन कर रहे हैं।

इनमें से 3 किसान 25-25 बायोफ्लॉक टैंक का संचालन कर रहे हैं। एक किसान ने रिस्पॉयरेटरी एक्वा कल्चर के 8 टैंक, एक किसान 7 टैंक बायोफ्लॉक (छोटा यूनिट) तथा एक किसान 4 टैंक से मत्स्य पालन शुरू किया है।

इसके अलावा एक किसान ने बायोफ्लॉक तालाब, फीड मिल स्थापित कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन एवं आय सृजन का प्रयास शुरू किया है। ये सभी योजनाएं वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2023-24 के बीच ली गई हैं। इन किसानों की पहल से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है बल्कि क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने मत्स्यपालकों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जिले के अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने जिला मत्स्य पदाधिकारी को निर्देशित किया कि मत्स्यपालन संबंधी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इससे जुड़ सकें। साथ ही जिला में फीड मिल की योजना से और किसानों को जोड़ने के भी निर्देश दिए।

उपायुक्त ने मत्स्यपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम बताते हुए किसानों से अपील की कि वे सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि करें। उपायुक्त ने कहा कि पारंपरिक कृषि कार्यों के साथ-साथ मत्स्य पालन जैसे व्यवसाय को अपनाने से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य सरकार किसानों को बायोफ्लॉक टैंक, फीड मिल एवं पॉन्ड निर्माण हेतु सहायता प्रदान कर रही है। इसके साथ ही, सब्सिडी की सुविधा भी दी जा रही है जिससे ग्रामीण आसानी से इस व्यवसाय को अपना सकें।

जिला के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास जारी हैं। मत्स्य पालन जैसे आय सृजन के वैकल्पिक साधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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