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शंकर जी ने संकेत दे दिया है, अगली महाशिवरात्रि तक बहुत बड़ा परिवर्तन दिखाई पड़ेगा, पहले डमरू बजेगा फिर तांडव होगा

Published on: 09-03-2024
  • केवल वक़्त के सन्त ही विधि का विधान, सृष्टि का नियम मिटा सकते हैं
  • लोग शाकाहारी नहीं बने तो घड़ी के पेंडुलम, चक्र की तरह धरती घूमेगी
  • प्रेमियो! आपको नहीं मालूम आपको कितनी ताकत दे दी गयी है, लोगों की जान बचाने में लगो

शकील अहमद

लखनऊ। वक़्त के सन्त, दुखहर्ता उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 8 मार्च 2024 को महाशिवरात्रि पर्व पर लखनऊ में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि आज आपको बता करके जा रहा हूँ, डम डम डम डम महादेव का डमरू बजने वाला है, अब कुछ होने वाला है, वक्त बदलने वाला है। आज की तारीख आप नोट कर लो, 8 मार्च 2024 महाशिवरात्रि की तिथि। अगला महाशिवरात्रि आने तक बहुत बड़ा परिवर्तन दिखाई पड़ेगा, डमरू का असर दिखाई पड़ेगा। संकेत उन्होंने कर दिया है। अब उनका डमरू लोगों को पता चलेगा, आगे क्या होने वाला है, इसका ट्रेलर वो दिखाएंगे, ट्रेलर दिखाने के बाद इनका तांडव होगा।

तांडव किसको कहते हैं

जैसे धम धम कोई नाचने लगे, पैर पटकने लगे तो उसको तांडव कहते हैं। ऐसे ही यह धरती पर पैर मारेंगे, चेतावनी फिर देंगे, जब नहीं मानेंगे तो काल के गाल में बहुत से लोग समा जाएंगे।

विधि का विधान वक्त के सन्त मिटा सकते हैं

विधि का विधान, सृष्टि का नियम को कोई मिटा नहीं पाता है लेकिन जिसका लक्ष्य उद्देश्य होता है कि जीवों को बचाया जाए, जीवों पर दया किया जाय, जो दयाल के अंश होते हैं, जो उनके नुमाइंदे, भेजे हुए होते हैं, जिनको सन्त सतगुरु, वक्त के गुरु महापुरुष कहते हैं, जैसे गुरु महाराज थे, उनके गुरु महाराज, उनके गुरु महाराज, यह जो सन्तों की वंशावली है, यह दयाल का काम किए हैं, जीवों को संभाले, बताते समझते थे, जब अत्याचार दुराचार कम था तब एक जगह से संभाल करते रहते थे और जब से लोगों की बुराइयां बढ़ी, खानपान खराब हुआ तो गुरु महाराज जैसे जगह-जगह पर दौड़ करके लोगों की बुराइयां छुड़ा करके अच्छाई की तरफ लगाते रहे, तो उनमें विधि के विधान को भी मेटने (मिटाने) की ताकत होती है।

प्रेमियो! आपको नहीं मालूम आपको कितनी ताकत दे दी गयी है, जान बचाने में लगो

अब आप समझो, वह ताकतें भी होती है तो कहां होती है? मनुष्य शरीर में ही होती हैं। वो, उन्ही ताकतों को लोगों को दे देते हैं। किनको? जो उनके नजदीक जाते हैं, उनकी बातों को समझ जाते हैं, उनके उद्देश्य के साथ जुड़ जाते हैं, उनको भी ताकतें मिल जाती हैं, वो बहुत से जीवों का भला कर देते हैं, रक्षा करा देते हैं, नरकों, चौरासी लाख योनियों में जाने से, कीड़ा-मकोड़ा बनने से वो जीवों को बचा लेते हैं। आपको नहीं मालूम है, आप कौन हो। आपको नहीं मालूम कि हमारे अंदर क्या ताकत है, और हम क्या कर सकते हैं। लेकिन गुरु की दया आपके ऊपर हो रही है। आप दया ले लो और इनको बचा लो, जो बारूद के ढेर पर खड़े हो रहे हैं, कभी भी आग लग जाए, ध्वस्त खत्म हो जाए, इनको बचा लो, समझा लो, बुद्धि को सही कर दो, हाथ जोड़ करके मना लो।

लोगों को मना लो, शाकाहारी बना दो नहीं तो घड़ी के पेंडुलम और चक्र जैसे घूमेगी धरती, लोग कैसे बचेंगे

हाथ जोड़कर के इनको सतयुग के लायक बना लो, अच्छा बना लो, प्रचार करो क्योंकि बहुत से अच्छे लोग पड़े हैं, जीवात्माएं पड़ी हैं, कुछ परिस्थितियों वश बुरे कामों में फंसे हुए हैं, अज्ञानता में खा रहे हैं, इनको शिव तांडव से बचाओ नहीं तो शिव धरती पर पर ही पैर पटकने लगेंगे, यह धरती हिलेगी जैसे घड़ी का पेंडुलम हिलता रहता है। जैसे चक्र चलता रहता है, ऐसे घूमेगी।

धरती धंस जाय, फट जाए, लोग समा जाए, आसमान से एक-एक दो-दो किलो के ओला पत्थर गिरने लग जाएं, उससे लोग मर जाए, क्या हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता है। लोगों को बताने की जरूरत है। बीमारियों से बचेंगे, खून खराब नहीं होगा, शुद्ध अंगों से की गयी इनकी पूजा-पाठ कबूल होने लगेगी, देवता कम से कम दया तो करेंगे, इंद्र वरुण पृथ्वी पांचों देवता ही लग जाए कि (ये मनुष्य) हमारे बनाए नियम का पालन करते हैं, या प्रभु इनको थोड़ा मौका दे दो तो उनकी भी बात मानेंगे।

उनके नियम के खिलाफ लोग काम न करने पावे, सबके अंदर दया आ जाए, हर जीव पर आदमी दया करने लग जाए, लोगों के अंदर जो इधर-उधर से कर्म आ जाते हैं, वह सेवा परोपकार के द्वारा कट जाए, बुरे कर्मों को लोग काटने लग जाएं, ऐसा काम आप करो। आज से अभियान आप चालू कर दो। अभी तो अपने प्रचार प्रसार किया, जीव जागरण धर्म यात्रा निकाला और होली कार्यक्रम में उज्जैन आश्रम आओ। वहां कुछ और आगे का आपको बताया जाएगा, कोई आदेश दिया जाएगा।

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