सीजेआई ने कहा वकालत कमजोर दिल वालों के लिए नहीं

बेंगलुरु। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि वकालत कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल सिद्धांत सीखना नहीं है, बल्कि समाज सेवा की भावना विकसित करना भी है। यह बात उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में कही।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विधि क्षेत्र में सफलता के लिए धैर्य, समर्पण और साहस जरूरी है। युवा वकीलों को न्याय व्यवस्था की चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। उन्होंने विधि छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का इस्तेमाल समाज के कमजोर वर्गों की मदद के लिए करें।
उन्होंने कहा कि समाज सेवा की भावना ही किसी वकील को सच्चा न्याय योद्धा बनाती है। कार्यक्रम में उपस्थित विधि विशेषज्ञों ने मुख्य न्यायाधीश के विचारों की सराहना की। उनके संबोधन को युवा वकीलों और छात्रों के लिए प्रेरणादायक बताया गया। न्यायपालिका की भूमिका पर भी इस दौरान व्यापक चर्चा हुई।



