दशहरे की अनूठी परंपराओं पर विशेष रिपोर्ट

दशहरे की अनूठी परंपराओं पर इस विशेष रिपोर्ट में बागपत के बड़ागांव से लेकर दिल्ली तक की झलक शामिल है। कहीं रावण का दहन ही नहीं होता, तो कहीं रावण के साथ तीस फुट का कॉकरोच पुतला आकर्षण का केंद्र बनता है। लोक उत्सव समय के साथ नए प्रतीक गढ़ते हैं, जबकि बुराई पर अच्छाई की जीत का मूल संदेश हर जगह एक ही रहता है। बड़ागांव की परंपरा हर साल लोगों को चौंकाती है, वहीं दिल्ली का अनूठा पुतला दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना। ये दोनों उदाहरण दिखाते हैं कि एक ही त्योहार अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग रंगों में मनाया जाता है। यह रिपोर्ट बताती है कि परंपराएं समय के साथ बदलती भी हैं और अपनी मूल भावना भी संजोए रखती हैं, यही इन लोक उत्सवों की सबसे बड़ी खूबसूरती है। यही इस विशेष रिपोर्ट का सार है। पाठकों के लिए प्रस्तुत है। सभी के लिए है।



