वांगचुक संस्थान की भूमि रद्द करने का बचाव किया प्रशासन ने

लद्दाख प्रशासन ने उच्च न्यायालय में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के संस्थान को दी गई भूमि का आवंटन रद्द करने के अपने फैसले का बचाव किया है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय नियमानुसार और विधिवत प्रक्रिया के तहत लिया गया था।
मामला उस भूमि आवंटन से जुड़ा है, जो वांगचुक के शैक्षणिक संस्थान को दिया गया था और बाद में प्रशासन ने उसे रद्द कर दिया था। संस्थान की ओर से इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान प्रशासन ने आवंटन रद्द करने के आधार और इससे जुड़े दस्तावेज रखे। प्रशासन का कहना है कि नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर ही यह कार्रवाई की गई।
इस मामले पर लद्दाख में व्यापक चर्चा हो रही है। अदालत के आगामी आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला क्षेत्र के शैक्षणिक और पर्यावरणीय कार्यों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
संस्थान के समर्थकों का कहना है कि यह संस्थान शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम कर रहा है। अदालत के फैसले का असर लद्दाख में ऐसे प्रयासों पर पड़ेगा।



