रोज़गार में महिलाएं आगे बढ़ीं, पर शहर और वेतन अंतर बना

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के ताजा आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार सितंबर 2026 में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 34.6 फीसदी हो गई, जो एक साल पहले 34.1 फीसदी थी। इस बढ़ोतरी की अगुवाई ग्रामीण महिलाओं ने की, जहां भागीदारी एक साल में एक प्रतिशत अंक बढ़कर 38.9 फीसदी पहुंच गई। शहरी क्षेत्रों में यह दर 25.9 फीसदी पर लगभग स्थिर रही।
रोजगार की गुणवत्ता पर नजर डालें तो तस्वीर मिली-जुली है। महिला कर्मी जनसंख्या अनुपात सालाना आधार पर 0.5 प्रतिशत अंक बढ़कर 32.8 फीसदी हुआ। ग्रामीण महिला बेरोजगारी 3.9 फीसदी के साथ 2026 के सबसे निचले स्तर पर है, लेकिन शहरी महिला बेरोजगारी बढ़कर 9.2 फीसदी हो गई है। वेतन का अंतर भी चिंता का विषय है: नियमित वेतनभोगी काम में महिलाएं पुरुषों की कमाई का 76 फीसदी, अनियत मजदूरी में 69 फीसदी और स्वरोजगार में मात्र 36 फीसदी कमा पाती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि भागीदारी बढ़ना स्वागतयोग्य है, लेकिन शहरी ठहराव और वेतन असमानता बताती है कि महिलाओं को अभी 'काम' तो मिल रहा है, 'बेहतर काम' नहीं। दोहरी आय वाले परिवारों की बात तभी सार्थक होगी, जब शहरों में महिलाओं के लिए सुरक्षित, नियमित और समान वेतन वाले अवसर बढ़ेंगे।



