मजदूरों के बच्चों की शिक्षा हेतु विशेष योजना की मांग उठी

लखनऊ। मजदूर संगठनों ने प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजना की मांग उठाई है। संगठनों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण हजारों बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
संगठनों ने मांग की है कि मजदूरों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, निशुल्क पाठ्यपुस्तकें और आवासीय विद्यालयों की सुविधा बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि शिक्षा का अधिकार संविधान में दर्ज है और इसे हर बच्चे तक पहुंचना चाहिए। मजदूर बस्तियों में विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की गई है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार बाल श्रम रोकने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी हथियार है। उन्होंने सरकार से मजदूर परिवारों के बच्चों के लिए विशेष बजट प्रावधान की मांग की है। प्रवासी मजदूरों के बच्चों के दाखिले में आ रही बाधाओं को दूर करना जरूरी है।
संगठनों का कहना है कि शिक्षित पीढ़ी ही गरीबी के चक्र को तोड़ सकती है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर ठोस नीति बनाने की अपील की है।



