Saturday, 24 October 2026  |  लखनऊ, उत्तर प्रदेश
● LIVE — ताज़ा अपडेट  |  lokayatdarpan.in
लोकायत दर्पण
Lokayat Darpan · Hindi News Portal · Lucknow, India
सत्य • निष्पक्ष • जनहित
ताज़ा ख़बरें, हर पल
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश की हर बड़ी ख़बर
ब्रेकिंग न्यूज़
पुराने किलों के संरक्षण से पर्यटन को नई उम्मीद मिली●महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के नए रास्ते●जल संरक्षण की परंपरागत विधियां फिर चर्चा में आईं●ग्रामीण हस्तशिल्प को बाज़ार तक पहुंचाने की कोशिशें तेज़●बच्चों के लिए विज्ञान प्रदर्शनी में जिज्ञासा दिखी●शहरी बागवानी से घरों में हरियाली बढ़ाने की पहल●युवाओं में पुस्तक पढ़ने की आदत फिर लौट रही है●गांवों में डिजिटल साक्षरता शिविरों की मांग बढ़ी●पुराने किलों के संरक्षण से पर्यटन को नई उम्मीद मिली●महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के नए रास्ते●जल संरक्षण की परंपरागत विधियां फिर चर्चा में आईं●ग्रामीण हस्तशिल्प को बाज़ार तक पहुंचाने की कोशिशें तेज़●बच्चों के लिए विज्ञान प्रदर्शनी में जिज्ञासा दिखी●शहरी बागवानी से घरों में हरियाली बढ़ाने की पहल●युवाओं में पुस्तक पढ़ने की आदत फिर लौट रही है●गांवों में डिजिटल साक्षरता शिविरों की मांग बढ़ी
ताज़ा खबरें

युवाओं में पुस्तक पढ़ने की आदत फिर लौट रही है

24 October 2026, 11:48 am  |  लोकायत दर्पण

मोबाइल और डिजिटल मनोरंजन के दौर में युवाओं के बीच पुस्तक पढ़ने की आदत एक बार फिर लौटती दिख रही है। किताबों की दुकानों और पुस्तकालयों में युवा पाठकों की संख्या बढ़ी है, जो उपन्यास, कहानियां, आत्मकथा और ज्ञानवर्धक किताबों में रुचि ले रहे हैं। युवा पाठकों का कहना है कि किताब पढ़ने से उन्हें एकाग्रता और कल्पना की वह गहराई मिलती है, जो तेज़ गति वाले डिजिटल माध्यमों में नहीं मिलती। कई युवाओं ने अपने बीच पुस्तक चर्चा समूह बनाए हैं, जहां वे पढ़ी हुई किताबों पर बातचीत करते हैं और एक-दूसरे को नई किताबें सुझाते हैं। शिक्षकों का मानना है कि यह बदलाव सकारात्मक है, क्योंकि पढ़ने की आदत भाषा, सोच और व्यक्तित्व तीनों को समृद्ध करती है। पुस्तक विक्रेताओं ने भी बताया है कि युवा पाठक अब केवल परीक्षा की किताबें ही नहीं, बल्कि साहित्य और जीवन से जुड़ी किताबें भी खरीद रहे हैं। सामाजिक मंचों पर किताबों से जुड़ी चर्चाओं ने भी इस आदत को बढ़ावा दिया है। युवाओं का कहना है कि दिन में कुछ समय किताब के साथ बिताना उनके लिए मानसिक शांति का भी साधन बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पढ़ने की यह वापसी आने वाले समय में समाज की सोच को और परिपक्व बनाएगी।

इसी श्रेणी की और ख़बरें

सभी देखें →