Saturday, 24 October 2026  |  लखनऊ, उत्तर प्रदेश
● LIVE — ताज़ा अपडेट  |  lokayatdarpan.in
लोकायत दर्पण
Lokayat Darpan · Hindi News Portal · Lucknow, India
सत्य • निष्पक्ष • जनहित
ताज़ा ख़बरें, हर पल
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश की हर बड़ी ख़बर
ब्रेकिंग न्यूज़
पुराने किलों के संरक्षण से पर्यटन को नई उम्मीद मिली●महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के नए रास्ते●जल संरक्षण की परंपरागत विधियां फिर चर्चा में आईं●ग्रामीण हस्तशिल्प को बाज़ार तक पहुंचाने की कोशिशें तेज़●बच्चों के लिए विज्ञान प्रदर्शनी में जिज्ञासा दिखी●शहरी बागवानी से घरों में हरियाली बढ़ाने की पहल●युवाओं में पुस्तक पढ़ने की आदत फिर लौट रही है●गांवों में डिजिटल साक्षरता शिविरों की मांग बढ़ी●पुराने किलों के संरक्षण से पर्यटन को नई उम्मीद मिली●महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के नए रास्ते●जल संरक्षण की परंपरागत विधियां फिर चर्चा में आईं●ग्रामीण हस्तशिल्प को बाज़ार तक पहुंचाने की कोशिशें तेज़●बच्चों के लिए विज्ञान प्रदर्शनी में जिज्ञासा दिखी●शहरी बागवानी से घरों में हरियाली बढ़ाने की पहल●युवाओं में पुस्तक पढ़ने की आदत फिर लौट रही है●गांवों में डिजिटल साक्षरता शिविरों की मांग बढ़ी
विशेष रिपोर्ट

ग्रामीण हस्तशिल्प को बाज़ार तक पहुंचाने की कोशिशें तेज़

24 October 2026, 11:49 am  |  लोकायत दर्पण

ग्रामीण हस्तशिल्प को बड़े बाज़ार तक पहुंचाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं, जिससे कारीगरों के जीवन में नई उम्मीद जगी है। गांवों में बनने वाले हस्तनिर्मित सामान — जैसे बुनाई, कढ़ाई, मिट्टी के बर्तन और लकड़ी की कारीगरी — अपनी बारीकी और परंपरा के लिए जाने जाते हैं। लेकिन लंबे समय से कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रही है कि उनका सामान सही खरीदार तक नहीं पहुंच पाता था। अब प्रदर्शनियों, मेलों और ऑनलाइन मंचों के ज़रिए कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जोड़ने के प्रयास हो रहे हैं। कारीगरों का कहना है कि जब उनका काम सही दाम पर बिकता है, तो उन्हें अपनी कला को आगे बढ़ाने का हौसला मिलता है। कई युवा भी अब अपने परिवार की पारंपरिक कला को अपनाने लगे हैं, क्योंकि उन्हें इसमें रोज़गार की संभावना दिख रही है। हस्तशिल्प से जुड़े संगठनों का कहना है कि कारीगरों को डिज़ाइन, पैकिंग और बाज़ार की समझ का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि उनका सामान आधुनिक ग्राहकों की पसंद के अनुरूप बन सके। खरीदारों का कहना है कि हस्तनिर्मित सामान में एक अलगपन और आत्मीयता होती है, जो मशीन से बने सामान में नहीं मिलती। विशेषज्ञों का मानना है कि हस्तशिल्प को सहेजना केवल कला को बचाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोज़गार को भी मजबूत करना है।

इसी श्रेणी की और ख़बरें

सभी देखें →