डिजिटल अरेस्ट ठगी: जागरूकता बढ़ी, पैसा लौटना अब भी चुनौती

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जनवरी से अगस्त 2026 के बीच डिजिटल अरेस्ट ठगी की 21,900 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 647 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फंसी है। अदालत ने 17 अक्टूबर 2025 को इस खतरे का खुद संज्ञान लिया था, जब हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति ने सीबीआई और ईडी के अधिकारी बनकर ठगों द्वारा एक करोड़ रुपये से ज्यादा लूटे जाने की शिकायत की थी। ठग व्हाट्सऐप कॉल और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पीड़ितों को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखते हैं और फर्जी अदालती आदेश दिखाकर डराते हैं।
अच्छी खबर यह है कि जागरूकता अभियानों का असर दिख रहा है। 2024 में 1,23,672 शिकायतों में 1,935 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी, जो 2025 में घटकर 58,239 शिकायतों और 1,211 करोड़ रुपये रह गई। लेकिन असली चुनौती पैसा वापस दिलाने की है। अप्रैल में शुरू हुए मनी रिस्टोरेशन पोर्टल से 4.69 लाख आदेशों पर 332.7 करोड़ रुपये लौटाए गए, जबकि कुल नुकसान हजारों करोड़ रुपये में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अब निवेश घोटालों की ओर बढ़ रहे हैं और एजेंटिक एआई जैसे औजारों से हमले खुद-ब-खुद जटिल होते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को संदिग्ध खातों पर अस्थायी रोक का तंत्र बनाने का निर्देश दिया है। बड़ा सवाल यही है कि बैंकिंग व्यवस्था पीड़ित के डर से पहले ठग के लेन-देन के पैटर्न को कब पहचानेगी।



