दिल्ली प्रदूषण और ग्रैप व्यवस्था पर विशेष रिपोर्ट

दिल्ली के प्रदूषण और ग्रैप व्यवस्था पर तैयार विशेष रिपोर्ट स्थिति की गंभीरता को सामने रखती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक का दो सौ चवालीस तक पहुंचना और ग्रैप-1 का लागू होना बताता है कि राजधानी की हवा फिर चिंता के दायरे में है।
शीतकालीन कार्य योजना में धूल नियंत्रण और प्रदूषण के स्रोतों के विश्लेषण पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार योजनाएं कागज पर मजबूत दिखती हैं, लेकिन असली कसौटी उनका जमीनी असर होगा, जो आने वाले दिनों में परखा जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय समन्वय के बिना राजधानी की हवा में स्थायी सुधार कठिन है। पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषण कारकों पर साझा रणनीति बनाना समय की मांग है।
आने वाले सप्ताह मौसम और प्रदूषण दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हवा की रफ्तार और तापमान में बदलाव ही तय करेगा कि हालात सुधरते हैं या और बिगड़ते हैं।प्रशासन की तैयारियों और नागरिकों की सतर्कता दोनों ही इस दौरान अहम भूमिका निभाएंगी।



