सिरपुर यूनेस्को संभावित सूची में शामिल हुआ

छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल सिरपुर यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। महानदी के किनारे स्थित यह स्थल अपने प्राचीन मंदिरों और अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। इस उपलब्धि के साथ सिरपुर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान की दिशा में आगे बढ़ा है।
सिरपुर का इतिहास पांचवीं से बारहवीं शताब्दी ईस्वी तक का बताया जाता है। इतने लंबे कालखंड में यहां विकसित हुई धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के अवशेष आज भी मौजूद हैं। प्राचीन मंदिरों की स्थापत्य कला और खुदाई से मिले अवशेष इस स्थल के गौरवपूर्ण अतीत की गवाही देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। देश-विदेश के पर्यटकों और शोधकर्ताओं के यहां आने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचने की संभावना है। साथ ही संरक्षण और अध्ययन की दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
संभावित सूची में शामिल होना विश्व धरोहर दर्जे की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। आगे की प्रक्रिया में स्थल के संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्थानीय लोगों के लिए भी यह गर्व का विषय है कि उनकी धरोहर को वैश्विक मंच पर स्थान मिला है।



