संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ बोले विस्थापितों के अधिकारों के बिना पुनर्निर्माण अधूरा

संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक पाउला गाविरिया बेतांकुर ने कहा है कि संघर्ष और आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण विस्थापित लोगों को सुरक्षित जीवन दोबारा बनाने का अवसर दे, न कि उन्हें और गहरे बहिष्कार की ओर धकेले। महासभा को सौंपी अपनी रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि बहाली को केवल खड़ी की गई इमारतों की संख्या से नहीं मापा जा सकता, खासकर वहां जहां हिंसा और विस्थापन जारी है।
उन्होंने बताया कि पुनर्निर्माण की वित्तीय जरूरतें अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं—गाजा में इकहत्तर अरब डॉलर से अधिक, लेबनान में ग्यारह अरब, सीरिया में दो सौ सोलह अरब और यूक्रेन में पांच सौ अट्ठासी अरब डॉलर। यमन, सूडान और दक्षिण सूडान में भी भारी जरूरतें हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि पुनर्निर्माण कभी तटस्थ नहीं होता; यह कौन नियंत्रित करता है, पैसा कौन देता है और निवेश से लाभ किसे मिलता है—ये फैसले या तो विस्थापित समुदायों के घाव भरते हैं या उन्हें गहरा करते हैं। केवल इमारतों और बजट पर केंद्रित नजरिया विस्थापन को लंबा खींच सकता है, विनाश से लाभ कमाने वालों को फायदा पहुंचा सकता है और ऐसे शहर बना सकता है जहां पुराने निवासी लौट ही न सकें।



