दर बढ़ोतरी पर बंटा आरबीआई, महंगाई पर चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के ब्योरे से पता चला है कि आगे दर बढ़ोतरी को लेकर सदस्यों में मतभेद हैं। बाईस अक्टूबर को जारी मिनट्स के अनुसार महंगाई सहनशीलता दायरे के ऊपरी छोर के करीब पहुंच रही है, जिससे नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ गई है। रेपो दर पच्चीस आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद पांच दशमलव पांच शून्य प्रतिशत पर है।
ब्योरे में कुछ सदस्यों ने लगातार बनी महंगाई को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही, जबकि अन्य ने वृद्धि पर असर की चिंता जताई। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर और फरवरी में और दर बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों से कर्ज महंगा होता है, जिसका असर आवास, वाहन और उद्योगों के निवेश पर पड़ता है। बाजार की नजर अब आगामी नीति समीक्षा पर टिकी है। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई के जोखिम को और बढ़ा दिया है, इसलिए आरबीआई सतर्क रुख अपनाए हुए है।



