शौर्य दिवस पर पैदल सेना के जवानों को श्रद्धांजलि दी गई

सत्ताईस अक्टूबर को शौर्य दिवस के अवसर पर देश ने पैदल सेना के जवानों के साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। इस दिन रक्षा मंत्री की ओर से इन्फैंट्री के जवानों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों की परवाह नहीं की। पैदल सेना को सेना की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि सबसे कठिन मोर्चों पर सबसे पहले यही जवान तैनात होते हैं। ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों, रेगिस्तान और बर्फीले इलाकों में भी ये सैनिक हर मौसम में डटे रहते हैं और देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। शौर्य दिवस का मकसद नई पीढ़ी को इन जवानों की वीरता, अनुशासन और कर्तव्य भावना से परिचित कराना भी है। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें शहीदों के परिवारों का सम्मान भी किया जाता है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि जवानों का बलिदान देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी कहानियां आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की सीख देती रहेंगी। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे शहीदों के परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना बनाए रखें।



