ई-20 पेट्रोल पर ऑटो उद्योग की प्रेस कॉन्फ़्रेंस: टोयोटा अधिकारी के दो बयानों से उठा सवाल, सरकार ने इंजन नुकसान के दावों को बताया मिथक

नई दिल्ली। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (ई-20) को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और विवाद के बीच ऑटो उद्योग के विशेषज्ञों ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का समर्थन किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि ई-20 भविष्य का स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन है तथा इससे जुड़े कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
इधर, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने कहा कि भारत अब बायोफ्यूल मिशन के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार डीज़ल में भी 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की दिशा में काम कर रही है। आइसोब्यूटेनॉल का उत्पादन भी इथेनॉल से किया जाएगा।
हालाँकि, इस पूरे मामले में Vikram Gulati, कंट्री हेड एवं एग्ज़ीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स एंड गवर्नेंस), Toyota Kirloskar Motor के दो अलग-अलग बयानों ने चर्चा को और तेज़ कर दिया है। प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने ई-20 को प्रदर्शन के लिहाज़ से बेहतरीन ईंधन बताया, जबकि एक दिन पहले दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था कि ई-20 के उपयोग से ईंधन दक्षता (फ़्यूल एफिशिएंसी) में कुछ कमी आती है।
उधर, Ministry of Petroleum and Natural Gas ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि सोशल मीडिया पर ई-20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे भ्रामक हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह कहना गलत है कि इथेनॉल से इंजन खराब हो जाता है, वाहन की वारंटी या बीमा समाप्त हो जाता है, इसके उत्पादन में अत्यधिक पानी की बर्बादी होती है या इससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।
बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कई वाहन मालिक ऐसे वीडियो साझा कर रहे हैं, जिनमें ई-20 पेट्रोल से इंजन की कार्यक्षमता और माइलेज प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि ऐसे दावों के समर्थन में कोई प्रमाणित वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं और ई-20 ईंधन निर्धारित मानकों के अनुरूप वाहनों के लिए सुरक्षित है।