शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में रखी जाएगी अमृतमयी खीर

सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को बेहद खास त्योहार माना जाता है और इस वर्ष यह पर्व पच्चीस अक्टूबर की रात मनाया जाएगा। इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में धन की कमी दूर होने की मान्यता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत की बूंदों की वर्षा होती है और शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। अंतरिक्ष के समस्त ग्रहों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा चंद्रकिरणों के माध्यम से पृथ्वी पर पड़ती है। पूर्णिमा की चांदनी में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखने के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि चंद्रमा के औषधीय गुणों से युक्त किरणें पड़ने से खीर भी अमृत के समान हो जाएगी और उसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल आश्विन पूर्णिमा तिथि पच्चीस अक्टूबर को सुबह शुरू होगी और छब्बीस अक्टूबर की सुबह समाप्त होगी। चूंकि पच्चीस अक्टूबर की रात को पूर्णिमा तिथि रहेगी, इसलिए चंद्रमा की पूजा और खीर रखने के लिए यही दिन उपयुक्त रहेगा। घरों में गाय के शुद्ध दूध और चावल से बनी खीर को जालीदार कपड़े से ढंककर खुले आसमान में रखा जाएगा।



